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Happy New Year 2019: बिसार कर बीते पलों को, नए साल का करें स्वागत

जीवन में आगे की सुधि लेने के लिए बीती को बिसारना जरूरी है। अपनी ही जिंदगी को हर कदम पर मुड़-मुड़ देखना किसी भी दृष्टि से सही नहीं कहा जा सकता। बीते कल से जुड़ी बातों को भूलना इसलिए भी अहम है कि समय के साथ चलने के लिए यही पहला कदम है। ऐसा कदम जो वक्त के साथ कदमताल करने की ऊर्जा देता है, बीते समय की शिकायतों से उबारता है। आज के साथ सहज रहना सिखाता है।

Happy New Year 2019: बिसार कर बीते पलों को, नए साल का करें स्वागत
जीवन में आगे की सुधि लेने के लिए बीती को बिसारना जरूरी है। अपनी ही जिंदगी को हर कदम पर मुड़-मुड़ देखना किसी भी दृष्टि से सही नहीं कहा जा सकता। बीते कल से जुड़ी बातों को भूलना इसलिए भी अहम है कि समय के साथ चलने के लिए यही पहला कदम है। ऐसा कदम जो वक्त के साथ कदमताल करने की ऊर्जा देता है, बीते समय की शिकायतों से उबारता है। आज के साथ सहज रहना सिखाता है। समझना जरूरी है कि वर्तमान को इस सहजता से जीए बिना जिंदगी के किसी भी मोर्चे पर कुछ सार्थक नहीं किया जा सकता। यूं भी नई शुरुआत के लिए पुरानी बातों को भुलाना बेहद जरूरी है। इसीलिए नए साल का स्वागत दिल से कीजिए।

वर्तमान का करें सदुपयोग

आने वाले कल की बेहतरी के लिए आज पर फोकस करना जरूरी है और आज के सही इस्तेमाल के लिए बीते कल को भुलाना। कहा भी जाता है कि भविष्य इस पर निर्भर है कि आज आप क्या करते हैं? और वर्तमान का सदुपयोग करने के लिए अतीत के बोझ को उतारना बेहद जरूरी है। वरना यह बोझिलता आपके आज के जीवन की गति काम कर सकता है।

बीते समय से जुड़ी बातों और यादों की पोटली को सहेजना, सामने मौजूद अच्छी चीजों और खुशियों को देखने-समझने और जीने में बाधा बनता है। इसलिए कोशिश करें कि ऐसी रुकावटें आपके वर्तमान समय के सार्थक इस्तेमाल में समस्या ना बनें। जॉर्ज ऑरवेल का कहना है, ‘जो अतीत पर नियंत्रण रखता करता है, उसका भविष्य भी नियंत्रित रहता है।

जो वर्तमान नियंत्रित रखता है उसका अतीत भी नियंत्रित रहता है।’ यकीनन कल, आज और कल सब जुड़ा-सा ही है। लेकिन जिंदगी की रफ्तार को गति देने वाले समय के इस ताने-बाने की बनावट में आपको इतना सतर्क तो रहना ही होगा कि ना बीते कल की शिकायतों की गांठ पड़े और ना ही आने वाले कल की फिक्र भरी उलझनें हावी हों। नए साल के पहले ही दिन वर्तमान के सदुपयोग के लिए आज को अच्छे से जीने की सोचें।

बेहतर भविष्य के लिए

अमेरिकी लेखक बेंजामिन फ्रेंकलिन के मुताबिक ‘अतीत को बार-बार देखने से यह समस्या आ सकती है कि कहीं हमारा भविष्य भी हाथ से न निकल जाए।’ यह सच है कि बार-बार मुड़कर देखना आज की दौड़ में ठोकर खाने की वजह बन सकता है। जिंदगी में अच्छा और बुरा हर रंग समाहित है।
साल के बारह महीनों में ऐसे कई रंग हमारे हिस्से आते हैं, जो कभी मन को भाते हैं तो कभी मन दुखाते हैं। लेकिन इन्हें सहेजकर आगे नहीं बढ़ा जा सकता। भावी जिंदगी को तराशने के लिए सुखद अनुभव से संबल और तकलीफदेह बातों से सबक लेकर आगे बढ़ने में ही समझदारी है।
भविष्य की बेहतरी के लिए सोच में ऐसा संतुलन लाना जरूरी है, जो बेहतरी की राह सुझाता हो, ताकि आज की कोशिशों में कोई कमी ना आए। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के मुताबिक, ‘भविष्य उन लोगों को पुरस्कृत करता है, जो सतत प्रयास करते हैं। मेरे पास स्वयं के लिए खेद महसूस करने के लिए समय नहीं है।
मेरे पास शिकायत करने का समय नहीं है। मैं सदैव प्रयत्नशील रहता हूं।’ आमतौर पर देखने में आता है कि अतीत का बोझ हर बीतते साल के साथ बढ़ता ही जाता है। खासकर उन लोगों का बीता हुआ कल आज पर हावी रहता है, जो तकलीफदेह परिस्थितियों से जूझते रहे हों।
ऐसे में बीती बातों को भूलने की कोशिश ना की जाए तो भविष्य की भी दिशा खो जाती है। दुनियाभर में ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं, जो सिद्ध करते हैं कि खराब अतीत वाले लोग ही सबसे अच्छे भविष्य का निर्माण करते हैं।

जीवन बनेगा सहज

जिंदगी की अपनी एक गति है। जीवन की इस पटरी पर दौड़ते हुए कभी उपलब्धियां हिस्से आती हैं तो कभी असफलताएं। लेकिन जीवन से सहजता नहीं खोनी चाहिए। बेहतरी की उम्मीद कायम रखना जरूरी है। आशाओं को संजोना और आगे बढ़ते रहने का जज्बा जरूरी है। ऐसे में मन-मस्तिष्क को अगर चैन नहीं तो आने वाले कल के लिए सपने नहीं देखे जा सकते।

इसीलिए खुद को सहज और जिंदगी को सरल रखने के लिए भी बीते कल से बाहर आना जरूरी है। ना तो बीते हुए समय की उलझनों और शिकायतों को लेकर आगे बढ़ा जा सकता है और ना ही अपनी उपलब्धियों के मद में जिंदगी से कदमताल की जा सकती है। जिंदगी में सहजता ना रहे तो खुद से ही संघर्ष करने के हालात बन जाते हैं।

अपने आप को लेकर आया यह नाखुशी का भाव, ना आज के लिए अच्छा है और ना ही आने वाले कल के लिए। इसीलिए जो बीत गया उसके लिए आज और आने वाले कल की बेहतरी को ना भूलें बल्कि गुजरे दौर को भुलाएं। जीवन को सहज बनाए रखने के लिए इतना भर करना काफी है।

प्रगाढ़ होगा खुद से खुद का रिश्ता

बीती को बिसारना, हर गुजरे हुए कल के असंतोष से बाहर आकर खुद से दोस्ती करने जैसा है। यानी जो हुआ सो हुआ पर मैं खुद मेरे साथ हूं। साथ ही आगे की सुधि लेना अपने आप का संबल बन फिर जिंदगी से जद्दोजहद करने की हिम्मत जुटाने जैसा। बीता कल भुलाए बिना ये दोनों ही बातें संभव नहीं।
पुराने दिनों का बोझ अपने आप को लेकर खीझ पैदा करता है। काश, ऐसा होता या वैसा होता। उस वक्त वो न किया होता या वैसा किया होता, जैसे अफसोस से भरे ऐसे भावों के कारण अपने आपसे ही दूरी बन जाती है। अपराधबोध का भाव भी मन में आने लगता है।
विख्यात बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा का कथन है,‘साल में केवल दो दिन हैं, जिनमें कुछ नहीं किया जा सकता। एक को बीता हुआ कल कहा जाता है और दूसरे को आने वाला कल। प्रेम, विश्वास और जीने के लिए सही दिन आज है।’ यकीनन प्यार, भरोसे और जीवन को जी भरकर जीने के मानवीय भाव औरों के लिए ही नहीं खुद के लिए भी जरूरी हैं।
जो अपने आप से जुड़े बिना नहीं आते। बीते समय की कटु स्मृतियां कई बार इस जुड़ाव में बाधा बनती हैं। इसीलिए खुद में विश्वास रखते हुए यह सोचें कि बीता हुआ कल बहुत सिखाकर गया है और आने वाला समय भी नई सीख और समझाइश साथ लाएगा। यह भरोसा ही आपके वर्तमान को खूबसूरत बनाएगा।
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