Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

Happy New Year 2019: नए साल पर ये संकल्प लें, सफलता चूमेगी कदम

मनुष्य अपने अस्तित्व में आने के बाद से ही नएपन के प्रति कौतुहल का भाव लिए रहा है। जीवन में कुछ भी घटित होने वाले नए के प्रति हम सब एक आशा, एक उत्साह और खुशी से भर उठते हैं। यही वजह है कि नए साल के आगमन की प्रतीक्षा भी हमारे भीतर एक तरह की ऊष्मा भर देती है।

Happy New Year 2019: नए साल पर ये संकल्प लें, सफलता चूमेगी कदम
मनुष्य अपने अस्तित्व में आने के बाद से ही नएपन के प्रति कौतुहल का भाव लिए रहा है। जीवन में कुछ भी घटित होने वाले नए के प्रति हम सब एक आशा, एक उत्साह और खुशी से भर उठते हैं। यही वजह है कि नए साल के आगमन की प्रतीक्षा भी हमारे भीतर एक तरह की ऊष्मा भर देती है। हालांकि दिन कोई भी पुराना नहीं होता है। यदि हमारे पास अपने समय को पहचानने की, उसे ठीक से देख सकने की दृष्टि हो, तो हमारा रोजमर्रा का जीवन भी किसी उत्सव-सा हो सकता है। आइए, विचार करें कि शरीर, मन, हृदय और आत्मा के जिन चार स्तरों पर हमारा अस्तित्व है, नया साल किस तरह इनके लिए एक अनूठा अवसर हो सकता है?

शरीर के प्रति रहें सजग

यह शरीर है, तभी मन, हृदय या आत्मा का भी कोई अनुभव हो सकता है। लेकिन ताज्जुब है कि यह जानते हुए भी हम में से अधिकतर लोग अपने शरीर को लेकर जरा भी होशमंद नहीं रहते हैं। अगर हम अपनी दिनचर्या पर नजर डालें तो पाएंगे कि हमारा अब तक का जीवन इस शरीर के प्रति अज्ञानता में, मूर्छा में बीता है।

शरीर की ओर हमारा ध्यान ही तब जाता है, जब हम बीमार पड़ते हैं। ध्यान रहे, कोई आपसे कितना ही प्रेम करता हो, लेकिन यदि आप असाध्य रोगों से लंबे समय तक घिरे रहे, तो धीरे-धीरे लोग आपसे विमुख होते जाएंगे। जीवन अनमोल है, बशर्ते आप स्वस्थ हों।

स्वस्थ रहने का लें संकल्प

विचार करें कि क्या बीत रहे वर्ष आपका स्वास्थ्य अच्छा रहा है? क्या आपने स्वयं के बीमार पड़ने के कारणों पर गौर किया है? क्या आपका भोजन ऐसा है, जिससे आपकी ऊर्जा ऊपर की ओर उठे और आप दीर्घायु हो सकें? नया साल इसके प्रति सजग रहने और अपने को ऊर्जावान बनाए रखने के संकल्प लेने का अवसर है।

प्रकृति की संगति में रहें। स्वास्थ्यकर भोजन लें और शरीर को हल्का-फुल्का रखें। योग या प्राकृतिक चिकित्सा आदि के बारे में आप जो जानकारी जुटाते हैं या अपने परिचितों को गाहे-बगाहे जो टिप्स देते हैं, उस पर स्वयं भी अमल करें। आप स्वस्थ रहेंगे, तभी आपकी सलाह को कोई गंभीरता से लेगा।

मन बना रहे नया

जीवन में जो भी परेशानियां हैं, वे सब प्रायः मन की ही होती हैं। हर कोई चाहता है कि दुनिया उसी के मुताबिक चले। यह संभव नहीं। नया साल मतभिन्नता के प्रति सम्मान का भाव रखने का एक अवसर है। बुद्ध ने जो अष्टांगिक मार्ग दिया है, उसमें से अगर किसी एक हो ही चुनने का विकल्प हो, तो सम्यक स्वीकार को ही चुना जा सकता है।

तमाम तरह के फूल हैं, तभी गुलाब का महत्व है। गौर करें कि क्या इस वर्ष आपकी कोई वास्तविक मानसिक प्रगति हुई है? पहले आप जिन जटिल चीजों को नहीं समझ पाते थे, क्या उनमें अब आपकी रुचि हो रही है? आपकी मौलिकता क्या है और उसे बचाए रखने के लिए क्या आपने इस वर्ष कोई प्रयत्न किया है या अगले वर्ष ऐसी कोई योजना है?

थोड़ा समय चिंतन-मनन के लिए रखें। इससे आपका मन पुराना होने से बचेगा, आपकी प्रज्ञा बढ़ेगी और आपका होना समाज के लिए भी मूल्यवान होगा। जिसका मन नया है, उसके लिए हर क्षण एक तरह का नयापन, एक उत्सुकता लिए होता है और वह रोजमर्रा की अपनी जिंदगी से ऊबता नहीं है।

इससे पुरानी बातों को भूलना आसान होता है और आप दुखी होने से बचते हैं और स्वयं को कुछ पल के लिए भूलने के वास्ते किसी दूसरी दुनिया में जाने की जरूरत नहीं रह जाती।

सद्भावना है सबसे जरूरी

हृदय का संबंध भावनाओं, आशाओं और कल्पनाओं से होता है। जिसका हृदय विकसित हो जाए, उसके लिए मन सेकेंडरी हो जाता है क्योंकि विचार की तुलना में भाव अधिक गहरी बात है। सारे गहरे संबंध हृदय से जुड़े होते हैं और संबधों का जो भी बिखराव है, वह हृदय की उपेक्षा के कारण ही है।

हृदय का भोजन है- सत्यवादिता। गौर करें कि आप इस वर्ष कितने मौकों पर झूठ बोले? किसी ने न पकड़ा हो, तो भी आप खुद तो जानते ही हैं। झूठ की लत व्यक्ति को हृदय रोगी बना देती है। इसलिए, ऐसे काम से बचें, जिनसे आपके हृदय के तंतु कंपते हों। स्वस्थ हृदय ही सद्भावना से भर सकता है।

सद्भावना अगर स्वयं से ऊपर उठे, तो पूरे विश्व का कल्याण कर सकती है। जो समष्टि के कल्याण की सोचता है और उसके लिए प्रयास भी करता है, उसका होना इस धरती पर स्वयं किसी देवता के होने जैसा है। विचार करें कि क्या आप सोच के स्तर पर अपने परिवार से ऊपर उठ पाए हैं?

क्या एक सभ्य नागरिक के तौर पर नए साल में समाज और देश के लिए कोई योगदान करने का भाव आपके भीतर है? गौर करें कि पिछले वर्ष की शुरुआत आपने जिस जोश के साथ की थी, वर्ष का अंत आते-आते आखिर वह क्यों ठंडा पड़ गया? वे कौन-सी घटनाएं रहीं, जिनसे जीवन का रोमांच जाता रहा?

कहीं ऐसा तो नहीं कि आप ही पुराने पड़ गए हों और आपके भीतर ही बदलाव की जरूरत हो? इसे परख कर स्वयं को बदलेंगे तो आने वाले वर्ष में मनचाहा बदलाव खुद में और जीवन में कर सकेंगे।

संबंधों को बनाएं प्रगाढ़

आत्मा का भोजन है प्रेम और प्रेम कोई मांगने की चीज नहीं है। मांगने के बजाय आप दाता बनें। कार्यस्थल पर हम अपने साथियों के साथ हंसी-मजाक करते हैं, यहां तक कि अनजान लोगों के साथ भी बात करते समय हम सहज रहते हैं। लेकिन घर आते ही हमारा चेहरा लटक जाता है।
वहां हम पहल नहीं करना चाहते, बल्कि दूसरों की पहल का इंताजार करते हैं। जैसे आप अप्रिय प्रसंगों को भूलना चाहते हैं, वैसे ही घर वाले भी उससे आगे बढ़ना चाहते हैं। दूसरों के भीतर हो रहे इन बदलावों को न समझ पाने के कारण ही समस्याएं बढ़ती जाती हैं। इसलिए, अहंकार छोड़ें और पहल करने की आदत डालें।
समीक्षा करें कि इस वर्ष आपके संबंधों की स्थिति क्या रही? सोशल मीडिया की मित्र-सूची से कोई भ्रम पैदा न हो। जब आपको वास्तविक सहयोग की आवश्यकता होगी, तब सुबह-शाम फूल-पत्ती संदेश भेजने वाले आस-पास न होंगे। तमाम शिकायतों के बावजूद, सगे-संबंधी ही ऐन वक्त पर काम आएंगे।
इसलिए, अपने संबंधों को समय दें। जैसे नए वर्ष के आस-पास प्रकृति की उष्णता बढ़ने लगती है, ऐसे ही, नया वर्ष सभी संबंधियों-परिचितों से संवाद बढ़ाने का, संबंधों में गर्मजोशी भरने का अवसर है ताकि संवाद और सामूहिकता बनी रहे। जो अप्रिय बीता, उसे भूलें और आगे की सुधि लें।
सहज बनें। यदि आपसे कोई भूल हुई हो, तो क्षमायाचना कर लें। यदि आप किसी से छले गए हों, तो उसे क्षमा कर दें। हमेशा-हमेशा के लिए कर दें।

संगीतमय हो जाए जीवन

भर्तृहरि कहते हैं-साहित्य, संगीत और कला से युक्त व्यक्ति ही वास्तव में मनुष्य है। विचार करें कि आपके जीवन में बीत रहे वर्ष में इस दृष्टि से क्या नया हुआ या आप अगले कुछ समय में क्या नया कर सकते हैं? पिछली बार आपने कोई अच्छा साहित्य कब पढ़ा?

क्या आपके वास्तविक मित्रों की संख्या बढ़ी है? पद, प्रतिष्ठा, धन की वृद्धि तो हुई लेकिन क्या आपकी चेतना का भी उसी अनुपात में विकास हुआ? क्या आप जो संगीत पसंद करते हैं, वह आपको शांत भी करता है? अगर कर रहा हो, तब भी, बाहर का संगीत और जश्न तो क्षणिक है।

अभी है, अभी नहीं है। क्या आप उस संगीत की ओर उन्मुख हैं जो शाश्वत है, जिसे सुनने वाला व्यक्ति कभी निराश नहीं होता और जिसकी मौजूदगी जीवन को संगीतमय बना देती है? इस धरती को ऐसे लोग चाहिए ताकि यह जगत ही संगीतमय हो सके।

बेहतर बदलाव का अवसर

आपके लिए नया वर्ष अपनी आध्यात्मिक यात्रा पर भी विचार का एक अवसर हो सकता है, क्योंकि इस यात्रा का कोई पड़ाव पुराना नहीं होता। जब चेतना का विकास होगा तभी आप सत्य की, शुभ की दिशा में सोचना शुरू करेंगे। तभी आप मुक्ति की दिशा में प्रेरित होंगे और आपको जीवन में आनंद ही असली शक्ति मालूम पड़ेगी।
आप आनंदित जीवन को उपलब्ध तभी हो सकेंगे, जब स्वयं बदल जाएं। पं. श्रीराम शर्मा ने इसलिए हम बदलेंगे, युग बदलेगा का आह्वान किया है। हम सिर्फ अपने आदर्श ही अच्छे न चुनें, स्वयं भी आदर्श बनें। पुराने आदर्शों के साथ स्वयं नया बनना मुश्किल है क्योंकि यह एक निश्चित पैटर्न पर आगे बढ़ने जैसा है, जबकि जीवन अनिश्चितताओं से भरा है।
स्वयं को बदलना इस सृष्टि को सुंदर बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है। बदलने की शुरुआत हल्के-फुल्के होने से करें। झूठ-मूठ की गंभीरता छोड़ें और जीवन को एक खेल की तरह लेने की आदत डालें। ज्ञान का बोझ आदमी को गंभीर बना देता है और जिसे हम ज्ञान समझते हैं, वह ज्ञान है भी नहीं, वह तो महज सूचनाओं का अंबार है और सूचनाएं रोज-रोज पुरानी होती जाती हैं।
जो गंभीर होता है, उदासी उसका स्वभाव बन जाता है और वह शिकायत भाव से भरा रहता है। ज्ञान वही है जो शाश्वत है। इसलिए ज्ञानी अहोभाव में जीता है। शुभ के प्रति संकल्पित हों। शुभता का भाव आत्मज्ञान की दिशा में पहला पड़ाव है।

सार्थकता के लिए करें प्रयास

ऐसा न हो हर साल की तरह यह भी एक और नया साल साबित हो। हर बार कृत्रिम बधाइयों-शुभकामनाओं का आदान-प्रदान और अगले दिन से फिर सब कुछ जस का तस! अभी तक लगभग हर नया साल हमने इसी तरह बिताया है। यह नया साल इससे इतर, कुछ सार्थक की तलाश का अवसर है।
जीवन की सार्थकता समय रहते संभल जाने और जीवन के रहस्यों को समझने में है। गौर करें कि आपके जीवन में क्या-क्या है, जिसे आप सार्थक कह सकते हैं। बड़े से बड़ा रहस्य यह है कि यह जीवन अनंत समय के लिए नहीं है, इसलिए उसे कृतज्ञतापूर्वक जी लेना चाहिए।
बुद्धपुरुषों की संगति आपके भीतर यह बोध जगाने में, आपकी आत्मिक यात्रा में सहायक होगी। धन्यवाद का भाव जिसके भीतर है, उसका पूरा जीवन एक वसंत है, उसके जीवन का एक-एक दिन नए साल जैसे उमंग और जोश से भरा होता है।
आने वाले साल से यह उम्मीद झिलमिलाती है कि वो और भी खुशहाल होगा। -ए. एल. टेनीसन
नए वर्ष का पहला दिन, 365 कोरे पन्ने वाली किताब के पहले पन्ने जैसा होता है। इसकी शुरुआत कुछ अच्छा लिखकर (यानी किसी बेहतर काम से) करें। - ब्राड पैसले
आने वाले वर्ष में भी गल्तियां करने से न डरें क्योंकि गल्तियों से ही आप सीखेंगे और संवरेंगे। - नील गेमैन
नए साल का जश्न मनाइए क्योंकि आपके पास अपनी गल्तियों को सुधारने का एक और अवसर मिल रहा है।
-ओफ्रा विनफ्रे
नए साल में प्रवेश का अर्थ है कि आप नई क्षमता, नई आत्मा और नई दृष्टि से नई शुरुआत करें। -जी. के. चेस्टरटन
नए साल में आपको चाहिए एक सपना, सपने को चाहिए प्रयास और प्रयास को चाहिए सही सोच क्योंकि सही सोच के बिना आप अपने सपने साकार नहीं कर पाएंगे। - एम एम इल्डन
Share it
Top