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अटल जी जन्मदिन विशेष: ''काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं.. गीत नया गाता हूं''

अटल बिहारी वाजपई जी सन् 1996 में पहली बार केवल 13 दिन के लिये प्रधानमंंत्री बने थे।

अटल जी जन्मदिन विशेष:

भारतीय राजनीति में धूमकेतु की तरह हमेशा चमकने वाले अटल बिहारी वाजपई जी सन् 1996 में पहली बार केवल 13 दिन के लिये प्रधानमंंत्री बने थे।

सन् 1999 में अटल जी की सरकार मात्र 1 वोट से सरकार गिर गई थी लेकिन इस दुखद स्थिति में भी अटल जी कभी स्वयं विचलित हुए और न पार्टी के सदस्यों को हार के कारण से दुखी होने दिया।

उन क्षणों में अटल जी उदास अवश्य थे पर हताश नहीं। यह तभी संभव है जब व्यक्ति में आत्मबल हो और अपने आप पर पूर्ण विश्वास हो।

पहली बार भारत के आम जनमानस ने इस दर्द को महसूस किया एक रिक्शा या हाथ ठेला चलाने वाला व्यक्ति भी अटल जी जैसे योग्य व्यक्ति की सरकार इस तरह गिरना पसंद नहीं कर रहा था।

पर अटल जी ने कहा ‘‘अपने अल्पमत को बहुमत में बदलने के लिये मैंने कोई गलत काम नहीं किया सदस्यों की खरीद फरोख्त का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।

सत्ता की चादर को मैंने 13 दिन बाद वेदाग रख दिया।’’ इसके लिये विरोधी नेताओं ने भी सदन में अटल जी की प्रशंसा की। सरकार गिरी किन्तु अटल जी ने हार नहीं मानी।

यहां हम जन्मदिन के मौके पर अटल जी के मन के दो भाव बताने जा रहे है जो उन्होंने पंक्तिबद्ध किये थ...................

पहला भाव - गीत नहीं गाता हूँ

नकाब चेहरे हैं,दाग बड़े गहरे हैं

टूटता तिलिस्म आज सच से भय खाता हूँ

गीत नहीं गाता हूँ

लगी कुछ ऐसी नज़र बिखरा शीशे सा शहर

अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूँ

गीत नहीं गाता हूँ

पीठ मे छुरी सा चाँद, राहू गया रेखा फांद

मुक्ति के क्षणों में बार बार बँध जाता हूँ

गीत नहीं गाता हूँ

दूसरा भाव: गीत नया गाता हूँ

टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर

पत्थर की छाती मे उग आया नव अंकुर

झरे सब पीले पात कोयल की कुहुक रात

प्राची मे अरुणिम की रेख देख पता हूँ

गीत नया गाता हूँ

टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी

अन्तर की चीर व्यथा पलको पर ठिठकी

हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा,

काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूँ

गीत नया गाता हूँ

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