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फोर्टिस हॉस्पिटल: डेंगू से बच्ची की मौत, हॉस्पिटल ने थमाया 18 लाख का बिल

बच्ची के माता पिता का आरोप है कि हॉस्पिटल ने इलाज में भी लापरवाही बरती थी।

फोर्टिस हॉस्पिटल: डेंगू से बच्ची की मौत, हॉस्पिटल ने थमाया 18 लाख का बिल

गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में डेंगू से पीड़ित 7 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई।

आश्चर्य की बात यह है कि बच्ची की मौत के बाद हॉस्पिटल ने द्वारका निवासी और बच्ची के पिता जयंत सिंह को दो हफ्तों के इलाज के लिए 18 लाख का बिल पकड़ा दिया।

डेंगू से पीड़ित अदया को अस्पताल ने 15 सितंबर को मृत घोषित कर दिया गया था। बच्ची के पिता जयंत अस्पताल द्वारा मनमानी फीस वसूलने से नाराज हैं।

हालांकि इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा पीड़ित परिवार के समर्थन में आए हैं और उन्होंने ट्वीट करके लिखा कि मुझे hfwminister@gov.in पर डिटेल भेजिए। हम इस माले पर जरूरी कार्यवाही करेंगे।

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क्या है पूरा मामला

मृतका को 27 अगस्त की रात तेज बुखार था, जिसके बाद परिजनों ने उसे द्वारका के सेक्टर 12 के रॉकलैंड अस्पताल में भर्ती कराया।

पीड़िता के पिता ने बताया कि अदया को उस कमरे में रखा गया, जहां बगल में स्वाइन फ्लू का मरीज भर्ती था। जब हमने इस बात का विरोध किया तो उसका कमरा बदलवाया।

इसके बाद जांच में अदया को IV का डेंगू पीड़ित पाया गया। जिसके बाद रॉकलैंड अस्पताल ने उसे दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने को कहा।

पीड़िता के पिता ने बताया कि हमने बेटी को फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसे तुरंत वेंटिलेटर में रखा गया।

अदया को तीन दिनों तक बेहोश रखा गया। वीकेंड होने के कारण चौथे और 5वें दिन भी वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था।

लेकिन अस्पताल ने परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों का खारिज किया है। एक सीनियर डॉक्टर के उनुसार, लड़की को डेंगू था और उसकी हालत बेहद नाजुक थी।

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बच्ची को पिछले अस्पताल की चिकित्सा सलाह के बिना यहां लाया गया। 14 सितंबर को उसे परिवार के कहने पर वेंटिलेटर से हटा दिया गया।

बच्ची के पिता को ब्रैंडेड दवाइयों के लिए 4 लाख रुपए भरने पड़े, जबकि सस्ती दवाइयां उपलब्ध थीं।

चिकित्सा सामग्रियों में 17,142 रुपए के 2700 ग्लव्ज शामिल थे जिसका बिल 2.73 लाख तक पहुंच गया था। वहीं ब्लड टेस्ट में 2.17 लाख का बिल बना। इसके बाद जांच के अलावा डायग्नोस्टिक्स में 29.20 लाख रुपए का खर्च आया।

बच्ची के पिता का कहना है कि हमारा इंश्योरेंस कवर 3 लाख रुपए का था, जिसके खत्म हो जाने के बाद फाइनेंस टीम ने हर रोज मुझे फोन कर पैसा भरने को कहा। जिसके बाद मैंने पैसा भरा।
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