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Guru Nanak Jayanti/ दुनिया में छाए सिख, गुरु नानक का नाम किया रोशन

भारतीय मूल की निक्की हेली को अमेरिका के अगले राष्ट्रपति के रूप में देखा जा रहा है। कनाडा में जगमीत सिंह को न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी का नेता चुन लिया गया है। भारतीय मूल के कनाडाई सिख हरजीत सज्जन को वहां का रक्षा मंत्री बनाया गया है।

Guru Nanak Jayanti/ दुनिया में छाए सिख, गुरु नानक का नाम किया रोशन
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भारतीय मूल की निक्की हेली को अमेरिका के अगले राष्ट्रपति के रूप में देखा जा रहा है। कनाडा में जगमीत सिंह को न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी का नेता चुन लिया गया है। भारतीय मूल के कनाडाई सिख हरजीत सज्जन को वहां का रक्षा मंत्री बनाया गया है।

कंवल सिंह बख्शी न्यूजीलैंड की संसद के सिख सांसद हैं। केन्या में एक सरदारनी सांसद है, नाम है सोनिया विरदी। इसके अलावा भी कई नाम हैं जो विदेश में उच्च पद पर हैं यानी सिखों की हर जगह हो रही है बल्ले-बल्ले।

ये अब संभव लग रहा है कि आने वाले समय में अमेरिका का राष्ट्रपति या कनाडा का प्रधानमंत्री कोई सिख बन जाए। अगर केन्या मूल के बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति बन सकते हैं तो भारतीय मूल की निक्की हेली को अमेरिका के अगले संभावित राष्ट्रपति के रूप में देखा जाना समझा जा सकता है।

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न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, मूल रूप से पंजाब के अमृतसर से संबंध रखने वाली निक्की हेली अमेरिका के 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की उप राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार होंगी।

उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का करीबी माना जाता है। उन्होंने ही दक्षिणी कैरोलिना की पंजाबी भारतीय मूल की गवर्नर निक्की हेली को संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत पद नामित किया। निक्की ने काफी कम उम्र में राजनीतिक जीवन में बड़ी सफलताएं हासिल की हैं।

निक्की हेली का असली नाम निम्रता रंधावा है, उनका जन्म अमेरिकी राज्य साउथ कैरोलिनी के बैमबर्ग में 1972 में हुआ था। उनके पिता का नाम अजीत सिंह रंधावा और मां का नाम राजकौर रंधावा है।

निक्की आज भी खुद को एक भारतीय माता पिता की गर्वीली बेटी और भारत को दूसरा घर मानती हैं। निक्की हेली उस समय चर्चाओं में आई जब मात्र 38 साल की उम्र में उन्हें साल 2011 में अपने गृह राज्य साउथ कैरोलिना का गर्वनर चुना गया। निक्की आगे चलकर अमेरिकी की राष्ट्रपति पद की प्रबल दावेदार होने वाली हैं।

उधर, कनाडा में 38 वर्षीय जगमीत सिंह को न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी का नेता चुन लिया गया है। जगमीत कनाडा की प्रमुख राजनीतिक पार्टी की अगुवाई करने वाले पहले भारतीय मूल के राजनेता बन गए हैं।

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ओंटारियो प्रांत के सांसद जगमीत सिंह को वर्ष 2019 के चुनाव में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की लिबरल पार्टी के खिलाफ दल का नेतृत्व करने के लिए प्रथम मतदान के आधार पर पार्टी का नेता चुना गया है।

जीत के बाद उन्होंने ट्वीट किया, धन्यवाद न्यू डेमोक्रेटस। प्रधानमंत्री की दौड़ अब शुरू हो गई। उन्होंने कहा, इसलिए मैंने कनाडा का अगला प्रधानमंत्री बनने के लिए अपना अभियान आधिकारिक तौर पर से शुरू कर दिया है। वर्ष 1979 में ओंटारियो के स्कारबोरो में जन्मे सिंह के माता-पिता पंजाब से यहां आए थे।

दरअसल भारत के बाद सर्वाधिक सिख सांसद कनाड़ा में हैं। कनाडा के पिछले आम चुनाव में पांच सिख संसद में पहुंचे। और अब वहां पर दो सिख मंत्री हैं। कनाडा की जनसंख्या में सिखों की हिस्सेदारी लगभग 1.4 प्रतिशत है। भारतीय मूल के कनाडाई सिख हरजीत सज्जन को रक्षा मंत्री बनाया गया है।

हरजीत सज्जन को कनाडाई सशस्त्र बलों के लेफ्टिनेंट कर्नल का मानद पद दिया गया है। वह वैंकूवर साऊथ के निर्वाचित सांसद हैं। सज्जन का जन्म भारत मे हुआ था और जब वह पांच साल के थे तो उनका परिवार कनाडा चला गया था। इस बीच, आसियान देश मलेशिया की संसद में दो सिख हैं।

हालांकि भारतीय मूल के तो कई सांसद हैं। वहां के चोटी के भारतीय मूल के नेता कृपाल सिंह का कुछ समय पहले निधन हुआ। वे सांसद होने के साथ-साथ देश के चोटी के वकील भी थे। वे डेथ पेनल्टी की हमेशा तगड़ी मुखालफत करते रहे। गोविंद सिंह देव भी मलेशिया में सांसद हैं।

वे पहली बार मार्च 2008 में सांसद बने सेलगॉर सीट से। वे भी पेशे से वकील हैं। राजनीति की दुनिया में उनके गुरु कृपाल सिंह ही रहे। उनके भाई जगदीप सिंह पेनांग एसेंबली के सदस्य हैं। मलेशिया में भारत वंशियों में सर्वाधिक तमिल हैं। हां, सिखों की भी आबादी खासी है।

अब ब्रिटेन का रुख कर लेते हैं। ब्रिटेन की मौजूदा संसद में कोई सिख नहीं है। हां, इससे पहले की संसद में इंदरजीत सिंह सिखों की नुमाइंदगी कर रहे थे। वे ब्रिटेन की संसद में पहुंचने वाले पहले पगड़ी पहनने वाले सिख सांसद थे। कंवल सिंह बख्शी न्यूजीलैंड की संसद के सिख सांसद हैं। उनका संबंध नेशनल पार्टी से है।

उनका परिवार 2001 में न्यूजीलैंड में जाकर बसा था। वे वहां पर बेहतर नौकरी की संभावनाएं तलाशने के इरादे से आए थे। वे दिल्ली से हैं। हालांकि उनके ऊपर आरोप भी लगते रहे हैं। एक बार उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने कुछ लोगों को न्यूजीलैंड में नौकरी दिलाने का झांसा देकर मोटा माल बनाया था। पर पुलिस जांच में उनके खिलाफ आरोप साबित नहीं हुए।

उधर, इंदरजीत सिंह भी दिल्ली से हैं। वे सिंगापुर की पार्लियामेंट में हैं। अब वे सियासत को लेकर बेहद संजीदा हैं। उन्होंने एक बार बड़े ही फख्र के साथ कहा था कि सिंगापुर में कई देशों से संबंध रखने वाले सांसद हैं। इससे साफ है कि सिंगापुर हर इंसान को बराबरी का हक देता है। प्रीतम सिंह भी सिंगापुर की संसद में हैं। वे उनका संबंध वर्कर्स पार्टी से है।

परमिंदर सिंह मारवाह अफ्रीका के किसी भी देश की संसद में पहुंचने वाले पहले सिख सांसद हैं। वे युगांडा की पार्लियामेंट में थे। वे बीते साल संसद के चुनाव में हार गए थे। वे भारत आते हैं। उनके परिवार ने 70 के दशक में भी युगांडा को नहीं छोड़ा था जब ईदी अमीन भारतीयों पर जुल्म ढा रहे थे। उनके दादा युगांडा में जाकर बसे थे। उनके दादा रेलवे में थे।

उन्होंने 30 और 40 के दशक में ईस्ट अफ्रीकी देशों में रेल लाइनें बिछाईं थीं। मारवाह अपने भारत भ्रमण के दौरान खासतौर पर स्वर्ण मंदिर गए थे मत्था टेकने के लिए। उन्हें गुरुदास मान की गायकी पसंद है। उनके पुरखे जालंधर से हैं। वे रामगढ़िया बिरादरी से आते हैं। उन्होंने एक रोचक जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि युगांडा में भी बहुत से लोग मानते हैं कि गुरु नानक देव जी बेंब ननिका में आए थे। ये जगह युगांडा की राजधानी कम्पाला के निकट है। और अफ्रीका से बाहर निकलने से पहले केन्या भी हो आते हैं। इधर एक सरदारनी सांसद है। दिल खुश हो गया ना आपका, नाम है सोनिया विरदी। सोनिया केन्या में महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ने वाली बड़ी एक्टिविस्ट मानी जाती हैं।

दरअसल वे पहली एशियाई मूल की महिला सांसद हैं केन्या में। वे मकरादा नाम की जगह की नुमाइंदगी करती हैं। मकरादा केन्या का अहम शहर इस लिहाज से है क्योंकि इधर काफी इंडस्ट्रीज हैं। वहां की अर्थव्यवस्था की इसे जान माना जा सकता है।

उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि उनकी जीत से केन्या की भारतीय मूल की आबादी बहुत गर्व महसूस कर रही है। सिख समाज तो खुश है ही। उऩके सांसद बनते ही उनके सम्मान में केन्या की राजधानी नेरौबी में श्रीगुरुसिंह सभा ने बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया था। यानी अब सिखों की हो रही है हर जगह बल्ले-बल्ले।

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