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गुजरात समाचार: 12000 स्कूल, पढ़ाने के लिए बस 2 शिक्षक

गुजरात के विकास मॉडल (Gujrat Model) की पिछले लोस चुनाव में काफी चर्चा रही। लेकिन यहां के शिक्षा की अब स्थिति बदहाल है। गुजरात के शिक्षा विभाग के एक सर्वे में सामने आया है कि राज्य के 32,722 सरकारी स्कूलों में से 12,000 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें सिर्फ एक या दो शिक्षक ही हैं।

गुजरात समाचार: 12000 स्कूल, पढ़ाने के लिए बस 2 शिक्षक
गुजरात के विकास मॉडल (Gujrat Model) की पिछले लोस चुनाव में काफी चर्चा रही। लेकिन यहां के शिक्षा की अब स्थिति बदहाल है। गुजरात के शिक्षा विभाग के एक सर्वे में सामने आया है कि राज्य के 32,722 सरकारी स्कूलों में से 12,000 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें सिर्फ एक या दो शिक्षक ही हैं।
इसी सर्वे में यह भी पता चला है कि राज्य में 15,171 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें 100 से भी कम बच्चे पढ़ते हैं। राज्य सरकार ऐसे कई स्कूलों को मर्ज करने का मन बना रही हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 8,673 स्कूल (कुल स्कूलों का 26 पर्सेंट) ऐसे हैं, जिनमें 51 बच्चों से कम की संख्या है, वहीं 6,498 स्कूल (कुल स्कूलों का 20 पर्सेंट) ऐसे हैं, जिनमें 100 से भी कम बच्चे पढ़ते हैं।
कुल मिलाकर बात करें तो 15,171 स्कूल (कुल स्कूलों का 46 पर्सेंट) ऐसे हैं, जिनमें 100 बच्चे ही पढ़ते हैं। इन स्कूलों में ज्यादातर स्कूल ऐसे हैं, जिनमें 10वीं कक्षा तक की पढ़ाई होती है और एक ही टीचर हर क्लास के बच्चों को पढ़ाता है।

स्कूलों को मर्ज कर सकती है राज्य सरकार

इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि गांवों में स्थित स्कूलों में टीचर पढ़ाने ही नहीं जाना चाहते हैं, इसी के चलते सरकार कार्रवाई का मन बना रही है। जानकारी के मुताबिक, राज्य सरकार उन स्कूलों को धीरे-धीरे बंद कर सकती है, जिनमें 100 से भी कम बच्चे हैं। राज्य के शिक्षा मंत्री भूपेंद्र सिंह चूड़ासम ने कहा, 'शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए हम स्कूलों को पास के उन स्कूलों में मिलाने के बारे में सोच रहे हैं, जहां शिक्षकों और छात्रों की संख्या कम है।

कक्षाएं बंद का भी विचार

पहले हम ऊंची कक्षा के छात्रों को ट्रांसपॉर्ट की सुविधा देंगे फिर कुछ कक्षाओं को बंद कर देंगे। धीरे-धीरे पर्याप्त वेरिफिकेशन के बाद और भी कक्षाओं को बंद कर दिया जाएगा। वह आगे कहते हैं कि मामला पैसा बचाने का नहीं है।

हमारी कोशिश शिक्षकों की संख्या और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर देकर शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना है। स्कूलों को मर्ज करने का विकल्प उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके शिक्षा सुधार करने में हो सकता है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम में भी बच्चों को ट्रांसपॉर्ट सुविधा देने का प्रावधान है।

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