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गुजरात चुनाव रिजल्टः वडगाम की जनता ने दिया जिग्नेश का साथ, 63,471 से जीते मेवाणी

जिग्नेश मेवाणी ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर वडगाम क्षेत्र से चुनाव लड़ा है। हालांकि उन्हें कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था। चुनाव आयोग के आदेश पर रविवार (17 दिसंबर) को वडगाम विधानसभा क्षेत्र में एक पोलिंग बूथ पर दोबारा से वोटिंग कराई गई।

गुजरात चुनाव रिजल्टः वडगाम की जनता ने दिया जिग्नेश का साथ, 63,471 से जीते मेवाणी

जिग्नेश मेवाणी ने 63,471 मतों से जीत दर्ज की है। जिग्नेश गुजरात के वडगाम से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ रहे थे। हालांकि उन्हें कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था। चुनाव आयोग के आदेश पर रविवार (17 दिसंबर) को वडगाम विधानसभा क्षेत्र में एक पोलिंग बूथ पर दोबारा से वोटिंग कराई गई। गुजरात विधानसभा चुनाव की 182 सीटों के लिए मतदान 9 और 14 दिसंबर को दो चरणों में कराया गया है।

आइए हम बताते है आपको जिग्नेश मेवाणी के राजनीति में आने का मकसद और उनका सफर।
जिग्नेश मेवाणी गुजरात में दलितों और मुसलमानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुए। जिग्नेश पिछले साल उना में दलितों पर हुए अत्याचार के बाद गुजरात के दलितों और मुसलमानों के लिए एक उद्धारक बन कर उभरे। उन्होंने उना कांड का विरोध किया और दलित आंदोलन का चेहरा बने। इसके गुजरात में दलित-मुस्लिम को भाजपा के खिलाफ एकजुट करने में कड़ी का काम किया।
पत्रकार, वकील फिर कार्यकर्ता और अब नेता बने जिग्नेश मेवाणी ने दलित आंदोलन के तहत कई रैलियां निकाली और घोषणा कि मरे हुए पशुओं का चमड़ा निकालने और मैला ढोना का काम दलित समाज का कोई भी व्यक्ति नहीं करेगा।
1980 में गुजरात के मेहसाणा में जन्मे मेवाणी इन दिनों मेघानीनगर में रह रहे हैं। यह अहमदाबाद का दलित बहुल इलाक़ा है। उनके पिता नगर निगम के कर्मचारी थे और अब रिटायर हो चुके हैं।
ब्रिटिश सरकार के ख़िलाफ़ महात्मा गांधी की 'दांडी यात्रा' से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने दलितों की यात्रा का आयोजन किया और उसे नाम दिया "दलित अस्मिता यात्रा।" अहमदाबाद से शुरू हुई इस यात्रा में उस समय 100 से अधिक लोग उनके साथ थे।
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