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गुजरात चुनाव परिणामः जानिए क्यों नहीं लड़ा हार्दिक पटेल ने चुनाव, ये थी पूरी रणनीति

गुजरात में पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग और पाटीदार आंदोलन की शुरूआत करने वाले हार्दिक पटेल की साख भी गुजरात चुनाव में लगी हुई।

गुजरात चुनाव परिणामः जानिए क्यों नहीं लड़ा हार्दिक पटेल ने चुनाव, ये थी पूरी रणनीति

गुजरात में पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग और पाटीदार आंदोलन की शुरूआत करने वाले हार्दिक पटेल की साख भी गुजरात चुनाव में लगी हुई। हालांकि हार्दिक पटेल ने चुनाव नहीं लड़ा है, लेकिन उनका यानि पाटीदारों का सर्मथन कांग्रेस पार्टी को रहा है।

हार्दिक पटेल ने सूरत में भाजपा के खिलाफ कई विधानसभा रैलियां की हैं। साल 2015 के सूरत नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को 36 सीटों पर जीत मिली थी। ऐसा 25 साल बाद हुआ था कि कांग्रेस नगर निगम चुनाव में पाटीदारों के दबदबे वाले इलाक़ों में जीत दर्ज करने में कामयाब रही थी।
स्थानीय नेताओं और पाटीदारों का मानना है कि 12 में से कम से कम सात सीटें ऐसी हैं जहां बीजेपी के लिए जीत आसान नहीं होगी। सूरत उत्तर, लिंबायत और कटारगाम जैसे इलाक़ों में कड़ी टक्कर होने की उम्मीद है। यहां की वरच्छा रोड, करंज, कटारगाम, कमरेज और सूरत दक्षिण सीटों पर पाटीदार वोटरों का दबदबा है।
गुजरात चुनाव के प्रचार के दौरान हार्दिक पटेल की कई सेक्स सीडी सोशल मीडिया वायरल हुई। जिसने हार्दिक की छवि पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। हालांकि उस पर पटेल ने कहा था कि यह भाजपा की साजिश है।
आइए हम आपको बताते है कि हार्दिक पटेल ने गुजरात की राजनीति में कैसे हलचल मचाई।
गुजरात में 2015 में अचानक आरक्षण की आग भड़की। 24 साल के हार्दिक ने एक महीने के अंदर ही गुजरात में 80 से ज्यादा रैलियां की थी। हार्दिक पटेल समाज शिक्षा और सरकारी नौकरियों में तेजी से आरक्षण की मांग करने लगे थे। हार्दिक उभार इतनी तेजी से हुआ कि शहर में जगह-जगह अपनी मांग के पक्ष में उतरे लोग आरक्षण से कम की बात करने को भी तैयार नहीं हो रहे थे।
हार्दिक ने ही 6 जुलाई को गुजरात के महेसाणा में आयोजित एक छोटी-सी रैली को अब विशाल रूप दे दिया है। अहमदाबाद चंद्रनगर गांव में रहने वाले हार्दिक पटेल कॉमर्स से स्नातक हैं। उनका जन्म 20 जुलाई 1993 को हुआ था।
एक मध्यमवर्गीय परिवार में पैदा हुए हार्दिक को भी इस बात का अंदाजा नहीं होगा कि इतनी कम उम्र में वो अपने समाज का नेता बनेगा और एक ऐसे आंदोलन का अगुवा बनेगा जिसने सरकार को हिलाकर रख दिया है।
आरक्षण को लेकर हार्दिक ने इस आंदोलन कि शुरुआत तब की जब खुद वो इसका शिकार बना। उसके पड़ोसी लड़के को कम नंबर के बावजूद सरकारी नौकरी मिल गई और वो मुंह देखता रहा।
हार्दिक ने जब युवाओं की बात को मंच पर उठाना शुरू किया तो उसे मंझे हुए नेताओं ने भी तवज्जो नहीं दी, लेकिन हार्दिक को पता था कि उसने जिस बात को छेड़ा है वह उसके समाज के तार को जरूर छुएगी, हुआ भी वही महज एक साल के अंदर हार्दिक पटेल का नाम हर पटेल की जुबान पर चढ़ गया खासकर युवाओं के।।
हार्दिक ने 2011 में सेवादल से अलग होकर वीरमगाम में एसपीजी यानी सरदार पटेल सेवादल शुरू किया था। हार्दिक के पिता बीजेपी पार्टी से जुड़े हुए हैं।
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