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लड़कियों का अकाल, यहां के 9 लाख से ज्यादा लड़के कुंवारे

गुजरात में लड़कियों की संख्या कम होने के कारण ज्यादातर लड़के शादी की उम्र में भी कुंवारे हैं।

लड़कियों का अकाल, यहां के 9 लाख से ज्यादा लड़के कुंवारे
अहमदाबाद. गुजरात में विषम लिंगानुपात के कारण लाखों लड़के कुंवारे बैठे हैं। जनगणना 2011 के आंकड़ों से पता चला कि 25 से 34 आयु वर्ग के करीब 11.83 लाख युवा अविवाहित हैं जिनमें 9.16 लाख पुरुष और 2.67 महिलाएं हैं।
आपको बता दें कि गुजरात में लडकियां अब गांवों में शादी करने के लिए राजी नहीं होती हैं। खासतौर पर गुजरात के सौराष्ट्र गांव में तो बिलकुल नहीं। पोरबंदर गांव में 34 साल के रमेश पटेल को आज भी इंतजार हैं अपनी शादी होने का। लेकिन उन्हें कोई दुल्हन नहीं मिल रही हैं जो उनके गांव में ही उनके साथ रह सके।
रमेश ने बताया कि, 'मैं अपने माता-पिता का इकलौता बेटा हूं और परिवार के खेती-बाड़ी को संभालने की जिमेदारी मेरी ही है। मैं एक लड़की से मिला जिससे मेरी शादी तय होनी थी। तब मैंने उसको बताया कि मैं अपना गांव और खेती नहीं छोड़ सकता और कहीं बाहर शिफ्ट होने में असमर्थता जताई तो उस लड़की ने मुझे रिजेक्ट कर दिया। मुझे बहुत अफसोस हुआ।'
गौरतलब है कि गुजरात विषम लिंगानुपात की चपेट में है। लड़कों के मुताबिक लड़कियों की संख्या कम होने के कारण ज्यादातर लड़के शादी की उम्र होते हुए भी कुंवारे हैं। यहां करीब 9.16 लाख पुरुष और 2.67 महिलाएं हैं जिसका इसका मतलब यह है कि हर दो अविवाहित महिलाओं के लिए, यहां 25-34 आयु वर्ग में सात अविवाहित पुरुष हैं। गुजरात में करीब 25 साल से अधिक की उम्र के 17.75 लाख अविवाहित महिलाएं और पुरुष हैं।
इंडिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बाल लिंगानुपात में महत्वपूर्ण गिरावट आई है। 1981 में 11000 लड़कों पर 947 लडकियां थीं वहीं 2011 में इसमें तेजी से गिरावट देखी गई। 2011 में 11000 लड़कों पर कुल 886 लडकियां ही बताई गई। आंकड़ों से पता चलता है कि गुजरात के पोरबंदर में सबसे ज्यादा एकल पुरुषों और महिलाओं की संख्या पाई गई है। जिसमें 25 साल से अधिक की आबादी का प्रतिशत 7.48% है। तो वहीं नवसारी में 7.22%, जूनागढ़ में 6.75%, भरूच में 6.61% और अहमदाबाद में 6.93% कुंवारे भरे पड़े हैं।
समाजशास्त्री गौरांग जानी का कहना है कि, 'अविवाहित पुरुषों की संख्या बढ़ने के कई करक हैं। "विषम लिंग अनुपात से एक गंभीर सामाजिक असंतुलन शुरू हो गया है। जिससे कई जिलों और गांवों में अविवाहित पुरुषों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय बनी हुई है। वहीं कई समुदायों में, लड़कियां लड़कों की तुलना में अधिक शिक्षित हैं और वह अशिक्षित युवाओं को रिजेक्ट कर देती हैं। साथ ही पिछले एक दशक में, देर से शादी करना भी एक ट्रेंड बन गया है।'
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