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GST In Hindi : जानें जीएसटी यानी ''वस्तु एवं सेवा कर'' से जुड़ी सारी बातें

केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की 31वीं बैठक दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई। आज हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में कई चीजों पर कर (Tax) घटाने का फैसला किया गया है।

GST In Hindi : जानें जीएसटी यानी

केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की 31वीं बैठक दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई। आज हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में कई चीजों पर कर (Tax) घटाने का फैसला किया गया है।

कुछ समय पहले पीएम मोदी ने कहा था कि जल्द ही 99 फीसदी सामान को जीएसटी के 18 फीसदी वाले दायरे में लाने की योजना है। हम आपको बताने जा रहे हैं कि जीएसटी क्या है..

जीएसटी क्या है (Goods and Services Tax)

वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Services Tax) एकीकृत कर प्रणाली है। इसमें सभी अप्रत्यक्ष करों को मिला दिया गया है। अब हर राज्य में अलग-अलग कर नहीं लगेगा बल्कि देश भर के लिए एक ही कर यानी जीएसटी होगा।

जीएसटी देश में 1 जुलाई 2017 से लागू एक महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था है। सरकार और अर्थशास्त्रियों के द्वारा जीएसटी को स्वतंत्रता के पश्चात् सबसे बड़ा आर्थिक सुधार बताया गया है। वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी को लागू करने के लिए भारतीय संविधान में संशोधन किया गया है।

1 जुलाई 2017 से पहले केंद्र सरकार और राज्य सरकारें कई तरह के अलग-अलग कर (Tax) लगाती थी लेकिन देश में जीएसटी लागू होने के बाद किसी भी तरह के सामानों पर एक जैसा ही कर लागू हो गया।

जीएसटी क्यों है महत्वपूर्ण?

जीएसटी टैक्स संरचना और अर्थव्यवस्था को बदलने में भूमिका निभाती है। भारत में कर को संरचना दो भागो में बांटा गया है। 1- प्रत्यक्ष (डायरेक्ट) कर, 2- अप्रत्यक्ष (इनडायरेक्ट) कर।

* डायरेक्ट कर वह है जिसमें देनदारी किसी और को नहीं दी जा सकती है।

* अप्रत्यक्ष या इनडायरेक्ट कर में टैक्स की देनदारी किसी अन्य व्यक्ति को दी जा सकती है।

* डायरेक्ट कर का उदहारण- जहां आप इनकम करते हैं और केवल आप उस पर टैक्स का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी हैं।

* इनडायरेक्ट कर का उदहारण- जो कोई दुकानदार अपने बिक्री पर वैट देता है तो वे दुकानदार अपने कस्टमर को देयता (देने का उत्तरदायित्व) दे सकता है।

जीएसटी में सभी अप्रत्यक्ष करों को मिला दिया गया है। ताकि कस्टमर और व्यापिरयों या दुकारनदारो को केवल एक ही तरह के टैक्स का भुगतान करना पड़े। इससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

जीएसटी कर तीन करों में बंटा

जीएसटी परिषद ने जीएसटी यानी नए टैक्स व्यवस्था को तीन श्रेणियों में बांटकर लागू किया। साथ ही लागू करके एक विधी को तैयार किया।

ये हैं तीन तरह के कर

CGST: जहां केंद्र सरकार द्वारा राजस्व एकत्र किया जाता है।

SGST: राज्य में बिक्री के लिए राज्य सरकारों द्वारा राजस्व एकत्र किया जाता है।

IGST: जहां अंतरराज्यीय बिक्री के लिए केंद्र सरकार द्वारा राजस्व एकत्र किया जाता है।

जीएसटी इन व्यवसायों पर लागू है

जीएसटी व्यापार, वाणिज्य, निर्माण, पेशे, पर लागू है। इसमें व्यवसाय शुरू करने से लेकर बंद करने के लिए माल और सेवाओं की आपूर्ति भी शामिल है। बता दें कि सेवाओं का मतलब वस्तु के अलावा कुछ भी हो सकता है लेकिन सेवाएं और सामान एक अलग जीएसटी दर होगी है।

जीएसटी सभी व्यक्तियों पर है लागू

जीएसटी में व्यक्तियों,सरकारी सोसायटी, एचयूएफ, सोसाइटी, ट्रस्ट, कंपनी, फर्म, एलएलपी,एओपी आदि शामिल हैं। यह कर कृषक विशेषज्ञों पर लागू नहीं है।

जीएसटी के लागू होने से ये कर हुए खत्म

देश में जीएसटी लागू होने के बाद एक ही तरह का कर दिया जाता है। जीएसटी लागू होने के बाद एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, वैट, मनोरंजन कर, लग्जरी कर समाप्त कर दिए गए।

जीएसटी लागू होने के पहले भारत में ये टैक्स लगते थे।

जीएसटी पंजीकरण करने के लिए ये दस्तावेज हैं जरूरी..

* पासपोर्ट साइज फोटो

* करदाता का संविधान

* कारोबार का स्थान और सबूत

* बैंक खाता विवरण / यानी बैक खाते की जानकारी

* प्राधिकरण फार्म

जीएसटी के तहत पंजीकृत नहीं होने के लिए ये हैं दंड

अगर कोई अपराधी टैक्स का भुगतान नहीं कर रहा है या फिर टैक्स का कम भुगतान कर रहा तो उसे देय कर राशि का दस फीसदी का जुर्माना देना होगा। जहां एक धोखाधड़ी देखी गई वहां पर अपराधी को देय कर राशि का 100 फीसदी जुर्माना देना होगा पड़ता है।

जीएसटी के लाभ

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार इस व्यवस्था से निम्न लाभ संभावित हैं।

व्‍यापार और उद्योग के लिए

आसान अनुपालन, पारदर्शिता: एक मजबूत और व्‍यापक सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली भारत में जीएसटी व्‍यवस्‍था की नींव होगी इसलिए पंजीकरण, रिटर्न, भुगतान आदि जैसी सभी कर भुगतान सेवाएं करदाताओं को ऑनलाइन उपलब्‍ध होंगी, जिससे इसका अनुपालन बहुत सरल और पारदर्शी हो जायेगा।

कर दरों और संरचनाओं की एकरूपता: जीएसटी यह सुनिश्चित करेगा कि अप्रत्‍यक्ष कर दरें और ढांचे पूरे देश में एकसमान हैं। इससे निश्चिंतता में तो बढ़ोतरी होगी ही व्‍यापार करना भी आसान हो जाएगा। दूसरे शब्‍दों में जीएसटी देश में व्‍यापार के कामकाज को कर तटस्‍थ बना देगा फिर चाहे व्‍यापार करने की जगह का चुनाव कहीं भी जाए।

करों पर कराधान (कैसकेडिंग) की समाप्ति- मूल्‍य श्रृंखला और समस्‍त राज्‍यों की सीमाओं से बाहर टैक्‍स क्रेडिट की सुचारू प्रणाली से यह सुनिश्चित होगा कि करों पर कम से कम कराधान हों। इससे व्‍यापार करने में आने वाली छुपी हुई लागत कम होगी।

प्रतिस्‍पर्धा में सुधार – व्‍यापार करने में लेन-देन लागत घटने से व्‍यापार और उद्योग के लिए प्रतिस्‍पर्धा में सुधार को बढ़ावा मिलेगा।

विनिर्माताओं और निर्यातकों को लाभ – जीएसटी में केन्‍द्र और राज्‍यों के करों के शामिल होने और इनपुट वस्‍तुएं और सेवाएं पूर्ण और व्‍यापक रूप से समाहित होने और केन्‍द्रीय बिक्री कर चरणबद्ध रूप से बाहर हो जाने से स्‍थानीय रूप से निर्मित वस्‍तुओं और सेवाओं की लागत कम हो जाएगी। इससे भारतीय वस्‍तुओं और सेवाओं की अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में होने वाली प्रतिस्‍पर्धा में बढ़ोतरी होगी और भारतीय निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। पूरे देश में कर दरों और प्रक्रियाओं की एकरूपता से अनुपालन लागत घटाने में लंबा रास्‍ता तय करना होगा।

केन्‍द्र और राज्‍य सरकारों के लिए

सरल और आसान प्रशासन - केन्‍द्र और राज्‍य स्‍तर पर बहुआयामी अप्रत्‍यक्ष करों को जीएसटी लागू करके हटाया जा रहा है। मजबूत सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली पर आधारित जीएसटी केन्‍द्र और राज्‍यों द्वारा अभी तक लगाए गए सभी अन्‍य प्रत्‍यक्ष करों की तुलना में प्रशासनिक नजरिए से बहुत सरल और आसान होगा।

कदाचार पर बेहतर नियंत्रण – मजबूत सूचना प्रौद्योगिकी बुनियादी ढांचे के कारण जीएसटी से बेहतर कर अनुपालन परिणाम प्राप्‍त होंगे। मूल्‍य संवर्धन की श्रृंखला में एक चरण से दूसरे चरण में इनपुट कर क्रेडिट कर सुगम हस्‍तांतरण जीएसटी के स्‍वरूप में एक अंत:निर्मित तंत्र है, जिससे व्‍यापारियों को कर अनुपालन में प्रोत्‍साहन दिया जाएगा।

अधिक राजस्‍व निपुणता – जीएसटी से सरकार के कर राजस्‍व की वसूली लागत में कमी आने की उम्‍मीद है। इसलिए इससे उच्‍च राजस्‍व निपुणता को बढ़ावा मिलेगा।

उपभोक्‍ताओं के लिए

वस्‍तुओं और सेवाओं के मूल्‍य के अनुपा‍ती एकल एवं पारदर्शी कर – केन्‍द्र और राज्‍यों द्वारा लगाए गए बहुल अप्रत्‍यक्ष करों या मूल्‍य संवर्धन के प्रगामी चरणों में उपलब्‍ध गैर-इनपुट कर क्रेडिट के कारण आज देश में अनेक छिपे करों से अधिकांश वस्‍तुओं और सेवाओं की लागत पर प्रभाव पड़ता है। जीएसटी के अधीन विनिर्माता से लेकर उपभोक्‍ताओं तक केवल एक ही कर लगेगा, जिससे अंतिम उपभोक्‍ता पर लगने वाले करों में पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।

समग्र कर भार में राहत – निपुणता बढ़ने और कदाचार पर रोक लगने के कारण अधिकांश उपभोक्‍ता वस्‍तुओं पर समग्र कर भार कम होगा, जिससे उपभोक्‍ताओं को लाभ मिलेगा।

जीएसटी समिति

यह कर वस्तु एवं सेवा कर परिषद् द्वारा निर्धारित किया जा रहा है जिसके अध्यक्ष केन्द्रीय वित्त मंत्री हैं।

जीएसटी की दरें

जीएसटी काउंसिल ने चार तरह के कर निर्धारित किये हैं ये 5, 12, 18 एवं 28 प्रतिशत। हालांकि बहुत सी चीजों को जीएसटी से छूट दी गई है उन वस्तुओं पर कोई भी कर नहीं लगेगा या जीएसटी नहीं लगेगा जबकि लग्जरी एवं महंगे सामान पर जीएसटी के अलावा सेस भी लगेगा। सरकार के अनुसार इसमें से 81 प्रतिशत चीजें जीएसटी की 18 प्रतिशत की श्रेणी तक आएंगी।

जीएसटी के सस्ते सामान

आवश्यक वस्तुओं जैसे कि दूध, लस्सी, दही, शहद, फल एवं सब्जियां, आटा, बेसन, ताजा मीट, मछली, चिकन, अंडा, ब्रेड, प्रसाद, नमक, बिंदी, सिंदूर, स्टांप, न्यायिक दस्तावेज, छपी पुस्तकें, समाचार पत्र, चूड़ियाँ और हैंडलूम आदि वस्तुओं पर जीएसटी नहीं लगेगा। 20 लाख से कम की वार्षिक बिक्री वाले व्यापारियों को इस कर व्यवस्था से छूट दी गई है।

प्राप्तियां

वापसी

जीएसटी के लिए पंजीकरण ऐसे करें

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