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जानिए कैसे देश में तीन भागों में काम करेगा GST

कर प्रणाली को आसान करेगा जीएसटी कानून

जानिए कैसे देश में तीन भागों में काम करेगा GST
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नई दिल्ली. देश में एक समान कर की व्यवस्था कायम करने वाले जीएसटी कानून कर प्रणाली को आसान करेगा, यह सुर चौतरफा सुनने को मिल रहे हैं। मसलन मोदी सरकार के लिए जीएसटी परिषद के गठन की मंजूरी होने के बाद अगले साल एक अप्रैल से देशभर में जीएसटी कानून लागू करने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। हालांकि इस कवायरद में चुनौतियां भी बाकी हैं।
केंद्र सरकार के देश में एक अप्रैल 2017 से जीएसटी कानून लागू करने की समय सीमा तय होने में एक कदम सोमवार को केंद्रीय कैबिनेट ने जीएसटी परिषद के गठन की प्रक्रिया को मिली मंजूरी ने आगे बढ़ा दिया है। आर्थिक विशेषज्ञों की माने तो यदि सब कुछ इसी तरह चलता रहा तो संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पारित कराने की तैयारी में जुटी केंद्र सरकार जीएसटी विधेयक के मसौदे को अंतिम रूप देने की चुनौती को भी पार कर लेगी। दरअसल यह परिषद ही देश में जीएसटी की दरें तय करेगी और जीएसटी कानून लागू करने के लिए तैयार किये जा रहे तीन अलग विधेयकों के मसौदे को अंतिम रूप देगी। जीएसटी परिषद के लिए सरकार से मिली मंजूरी के साथ ही वित्त मंत्रालय ने संविधान संशोधन के तहत जीएसटी परिषद की प्रक्रिया शुरू करने की अधिसूचना भी जारी कर दी है।
अभी चुनौती नहीं हुई कम
आर्थिक विशेषज्ञों की माने तो जीएसटी संबन्धी संविधान संशोधन विधेयक राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मंजूरी मिलने के बाद ही सरकार का जीएसटी को लागू करने का मुख्य कार्य शुरू हुआ है, जिसमें केंद्र और राज्यों को जीएसटी की दरों को तय करना कम चुनौती नहीं होगी। इसका कारण है कि ये दरे ऐसे तय करनी होंगी, जिसमें केंद्र या राज्यों को राजस्व की हानि न हो। वहीं ऐसे फैसलों में जनता को महंगाई से राहत दिलाने की चुनौती भी कायम रहेगी।
तीन भागों में होगा जीएसटी
जीएसटी कानून बनान के लिए तीन प्रकार के विधेयक तैयार किये जाएंगे, जिसमें एक केंद्रीय जीएसटी, दूसरा राज्य जीएसटी और तीसरा अंतर्राज्यीय जीएसटी शामिल होंगे। परिषद इन तीनों जीएसटी कानून के मसौदे में शामिल किये जाने वाले प्रावधानों को पर सहमति बनाएगी। संविधान संशोधन अधिनियम के तहत केंद्रीय जीएसटी यानि सीजीएसटी को केंद्र सरकार वसूल करेगी। जबकि राज्य जीएसटी यानि एसजीएसटी को राज्य सरकारें वसूल करेंगी। तीसरा इंटीग्रेटेड जीएसटी यानि आईजीएसटी वसूलने का अधिकार केंद्र सरकार के पास होगा, लेकिन यह दो राज्यों के बीच होने वाले कारोबार पर लागू होगा, इसलिए केंद्र सरकार इस कर को वसूल कर उसे दोनों राज्यों में बराबर बांटेंगी।
जीएसटी परिषद के अधिकार
जीएसटी परिषद का प्रमुख अधिकार जीएसटी दरों का निर्धारण करना है। मसलन जीएसटी के दायरे और इससे बाहर रखे जाने वाले उत्पादों व सेवाओं के करों, कराधान की दरें, नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के लिए कर की दर, उसमें दी जाने वाली छूट जैसे करो की सीमा पर फैसला करेगी। वहीं करों की वसूली की सीमा पर भी फैसला लेने का अधिकार परिषद को होगा। परिषद के अधिकार क्षेत्र में करों की वसूली की सीमा पर भी फैसला करना भी शामिल है।
देश में बनेगा एकल बाजार
केंद्र सरकार का देश में जीएसटी कानून लागू करने का मकसद है कि सभी राज्यों में लगभग सभी उत्पाद एक ही कीमत पर मिलेंगे। अभी एक ही उत्पाद के लिए दो राज्यों में अलग-अलग कीमत चुकानी पड़ती है। दरअसल इसकी वजह अलग-अलग राज्यों में लगने वाले कर भी हैं। इसके लागू होने के बाद देश बहुत हद तक एकल बाजार बन जाएगा।
ऐसा होगा परिषद का स्वरूप
जीएसटी परिषद में केंद्रीय वित्त मंत्री अध्यक्ष, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री (राजस्व) और सभी राज्यों के वित्त मंत्री इसके सदस्य होंगे। राजस्व सचिव जीएसटी परिषद के पदेन सचिव होंगे। इसमें केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड के अध्यक्ष को स्थायी आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा, लेकिन उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा। इन फैसलों को अंतिम रूप देने के लिए केंद्र का एक तिहाई मत होगा, जबकि राज्यों का इसमें दो-तिहाई दखल होगा। प्रस्ताव मंजूर होने के लिए तीन-चौथाई बहुमत होने का प्रावधान तय किया गया है।
दायरे में होंगे कौन से उत्पाद
मंत्रालय के अनुसार जीएसटी कानून लागू करने के लिए चल रही मशक्कत के बीच सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम की अध्यक्षता वाली समिति ने 'मेरिट गुड्स' की श्रेणी में कुछ वस्तुओं को जीएसटी के दायरे से बाहर रखने या उन पर बहुत कम टैक्स लगाने के संबंध में सिफारिशें दी हैं। इन वस्तुओं में अधिकांशत: अनाज, खाद्य तेल, सब्जियां और ईधन जैसी रोजमर्रा की वस्तुएं शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि जीएसटी समिति आगामी दो दिन की बैठक में इन सिफारिशों पर भी गौर करके फैसला लेगी।
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