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केंद्र ने सालाना कारोबार करने वाले कारोबारियों को जीएसटी में दी छूट

पूर्वोत्तर राज्यों में छूट की सीमा रहेगी दस लाख

केंद्र ने सालाना कारोबार करने वाले कारोबारियों को जीएसटी में दी छूट
नई दिल्ली. केंद्र सरकार की अगले साल एक अप्रैल से जीएसटी कानून लागू करने की तैयारी के तहत जीएसटी परिषद ने बीस लाख रुपये सालाना कारोबार करने वाली कंपनियों को जीएसटी से छूट देने का फैसला किया है। जबकि पूर्वोत्तर राज्यों में जीएसटी कर से छूट की सीमा दस लाख रुपये निर्धारित करने का निर्णय लिया गया है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की दो दिन तक चली पहली बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। जीएसटी परिषद की बैठक के बाद स्वयं केंद्रीय वित्त मंत्री ने एक संवाददाता सम्मेलन में लिए गये फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि कि देश में जिन कारोबारियों का सालाना टर्न ओवर 20 लाख रुपये से ज्यादा होगा उसी पर जीएसटी दरे लागू की जाएंगी।
वहीं पूर्वोत्तर राज्यों के कारोबारियों के लिए जीएसटी की यह सीमा दस लाख रुपये होगी। परिषद ने यह भी फैसला किया गया है कि सभी उपकर जीएसटी में समाहित हो जायेंगे। इस छूट के लिए परिषद की 30 सितंबर को होने वाली अगली बैठक में नियमों के मसौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा। वहीं जेटली ने करो की दर के बारे में कहा कि परिषद करों की दर और टैक्स स्लेब पर अक्टूबर में होने वाली बैठक में तय करने का प्रयास करेंगी। परिषद की यह बैठक 17,18 और 19 अक्टूबर को आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
राज्यों को मुआवजा मिलेगा
जेटली ने कहा कि जीएसटी लागू होने पर राज्यों को दिया जाने वाला मुआवजा नियमित तौर पर दिये जाने पर भी जीएसटी परिषद में सहमति बन गई है। मुआवजा कानून और मुआवजा फार्मूले पर काम कर रही परिषद ने निर्णय लिया है कि इस मुआवजे के आंकलन के लिए 2015-16 को आधार वर्ष माना जाएगा। वहीं मुआवजे के भुगतान के लिये फामूर्ले पर राज्य एवं केंद्र के बीच विचार होगा। इसके अलावा जिन कारोबारियों का का सालाना टर्न ओवर 1.5 करोड़ से कम होगा, वह राज्यों के दायरे में होंगे और उनसे राज्य सरकारें ही कर की वसूली करेंगी। वहीं जिनका कारोबार 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है, दोहरे नियंत्रण से बचने के लिये उनसे केंद्र या राज्य के अधिकारी में से कोई एक पूछताछ करेगा। हालांकि 11 लाख सेवा करदाता जिनका आकलन फिलहाल केंद्र करता है, वे उनके साथ बने रहेंगे। इस श्रेणी में जो नये करदाता सूची में आएंगे, उसे केंद्र एवं राज्यों के बीच विभिाजित किया जाएगा।
इन मुद्दों पर बनी सहमति
वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि जीएसटी परिषद की बैठक में इस बात को लेकर आम सहमति थी कि नई व्यवस्था के क्रियान्वयन के कारण राज्यों के राजस्व में किसी प्रकार के नुकसान को लेकर मुआवजे का भुगतान नियमित अंतराल पर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह तिमाही और हर दो महीने पर होना चाहिए। जेटली ने कहा कि अगले पांच साल के दौरान राजस्व वृद्धि के अनुमान के तौर-तरीकों पर भी कुछ सुझाव दिये गये। उन्होंने कहा कि हमने तीन-चार सुझाव लिये हैं और इस बीच अधिकारी उस पर विचार करेंगे कि उनमें से कौन सा विकल्प बेहतर होगा। एक विकल्प यह भी है कि पिछले पांच साल में जो बेहतर तीन साल हैं, उसे चुना जाए। एक अन्य सुझाव यह आया कि राजस्व वृद्धि दर निर्धारित कर ली जाये और उसी के अनुरूप मुआवजा दिया जाये। बैठक में यह भी तय किया गया कि जीएसटी व्यवस्था में केवल पांच प्रतिशत मामलों का आडिट किया जाएगा।
जीएसटी लागू होते ही सीमा चौकी होंगी बंद
वित्त मंत्रालय को वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि जीएसटी कानून के प्रभावी होते ही देश में सभी अंतरर्राज्यीय जांच चौकियों को बंद करना जरूरी होगा। सूत्रों ने कहा कि इस कदम से एक राज्य से दूसरे राज्य में वस्तुओं की बिना किसी बाधा के आवाजाही हो सकेगी और यह खासकर निर्यातकों के लिये बड़ी राहत का काम करेगा। भारतीय निर्यातकों के लाजिस्टिक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने के मद्देनजर वित्त मंत्रालय को यह सुझाव दिया गया है। इसके कारण में सूत्रों ने कहा कि असम में एक ट्रक को अंतरराज्यीय जांच चौकी पर करीब 258 मिनट लगते हैं। कुछ राज्यों में इसमें 60 से कई घंटे तक समय लगता है। एक अध्ययन के मुताबिक देश में ट्रक 60 प्रतिशत समय सड़कों पर चलने में तथा 40 प्रतिशत समय जांच चौकियों और अन्य मंजूरी संबंधी मामलों को देते हैं। इसके कारण ट्रकों की उत्पादकता पर असर पड़ता है और दरें बढ़ती है। देश में 600 से अधिक अंतरराज्यीय जांच चौकी हैं और इससे ट्रकों का यात्रा समय बढ़ता है।

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