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GST काउंसिल ने ई-वे बिल पर लगाई मुहर, आम आदमी को होंगे ये फायदे

गुड्स एंड सर्विस टैक्स की बैठक में मोदी सरकार ने ई-वे बिल पर अपनी मुहर लगा दी है। साथ ही 16 जनवरी से ई-वे बिल सिस्टम का ट्रायल शुरू हो चुका है।

GST काउंसिल ने ई-वे बिल पर लगाई मुहर, आम आदमी को होंगे ये फायदे
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गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानी जीएसटी में बदलाव को लेकर मोदी सरकार लगातार काम कर रही है। सरकार ने जीएसटी काउंसिल की हुई बैठक में 29 तरह के सामान और 53 तरह की सेवाओं पर जीएसटी की दर कम करने का फैसला किया है।

वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार ने ई-वे बिल पर भी मुहर लगा दी है। अब पूरे देश में 1 फरवरी 2018 से ई-वे बिल लागू होगा। वहीं 1 जून से इंटर-स्टेट ट्रांसपोर्ट पर ई-वे बिल भी लागू होगा।

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बता दें कि 16 जनवरी से ई-वे बिल सिस्टम का ट्रायल शुरू हो चुका है। इसके अलावा जिन राज्यों की ई-वे बिल को लेकर तैयारी पूरी हो गई होगी ऐसे राज्यों में 1 फरवरी से ई-वे बिल लागू किया जा सकेगा।

इन चीजों पर नहीं लागू होगा ये बिल

बता दें कि इस बिल में कॉन्ट्रासेप्टिव, जुडीशल और नॉन-जुडिशल स्टांप पेपर, न्यूज पेपर, जूलरी, खादी, रॉ सिल्क, इंडियन फ्लैग, ह्यूमन हेयर, काजल, दीये, चेक, म्युनिसिपल वेस्ट, पूजा सामग्री, एलपीजी, केरोसिन और करंसी को बाहर रखा गया है।

वहीं ई-वे बिल की जरूरत नॉन-मोटर कनवेंस, पोर्ट से ट्रांसपोर्ट होने वाले गुड्स, एयरपोर्ट, एयर कार्गो कॉम्पलेक्स और लैंड कस्टम स्टेशन के लिए आने-जाने वाले गुड्स पर नहीं होगी।

क्या है ई-वे बिल

ई-वे बिल के तहत 50 हजार रुपये से अधिक के अमाउंट के प्रोडक्ट की राज्य या राज्य से बाहर ट्रांसपोर्टेशन या डिलीवरी के लिए सरकार को पहले ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए बताना होगा। इसके तहत ई-वे बिल जनरेट करना होगा जो 1 से 15 दिन तक मान्य होगा।

यह मान्यता प्रोडक्ट ले जाने की दूरी के आधार पर तय होगा। जैसे 100 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 1 दिन का ई-बिल बनेगा, जबकि 1,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए 15 दिन का ई-बिल बनेगा।

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सरकार को फायदा

ई-वे बिल (इलेक्ट्रॉनिक बिल) माल ढुलाई पर लागू होगा। इसकी वैधता दूरी के हिसाब से तय होगी। ई-वे बिल में माल पर लगने वाले जीएसटी की पूरी जानकारी होगी। ई-वे बिल से पता लगेगा कि सामान का जीएसटी चुकाया है या नहीं।

ई-वे बिल से टैक्स वसूली में भारी गिरावट रुकेगी और टैक्स चोरी के मामलों पर लगाम लगेगी। ई-वे बिल के जरिये एक राज्य से दूसरे राज्य में मालढुलाई में दिक्कतें कम होंगी।

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