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GSAT-7A / जानें ISRO के साल के आखिरी मिशन ''जीसैट-7ए'' की क्या है खासियत

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आज साल के आखिरी मिशन को अंजाम देगा। इस मिशन के तहत शाम 4:10 बजे श्रीहरिकोटा से संचार उपग्रह जीसैट-7ए को लॉन्च किया जाएगा। हम आपको बता रहे हैं कि जीसैट-7 आखिर क्या काम करेगा और यह देश के लिए कैसे लाभकारी होगा।

GSAT-7A / जानें ISRO के साल के आखिरी मिशन
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आज साल के आखिरी मिशन को अंजाम देगा। इस मिशन के तहत शाम 4:10 बजे श्रीहरिकोटा से संचार उपग्रह जीसैट-7ए (GSat-7A) को लांच किया जाएगा। हम आपको बता रहे हैं कि जीसैट-7ए आखिर क्या काम करेगा और यह देश के लिए कैसे लाभकारी होगा।
  • जीसैट-7ए एक संचार सैटेलाइट यानी कम्युनिकेशन सैटेलाइट है।
  • जीसैट-7ए का वजन 2250 किलोग्राम है।
  • जीसैट-7ए भारत में केयू-बैंड उपभोक्ताओं की संचार क्षमता को बढ़ाएगा।
  • जीसैट-7ए भारतीय वायुसेना के लिए संचार सुविधाएं बढ़ाएगा। मतलब वायुसेना के विमान, हवा में मौजूद अर्ली वार्निंग कंट्रोल प्लेटफॉर्म, ड्रोन और ग्राउंड स्टेशनों को आपस में जोड़ेगा। जिससे कि एक सेंट्रल नेटवर्क बनेगा।
  • जीसैट-7ए को श्रीहरिकोटा के स्पेसपोर्ट के दूसरे लांच पैड से जीएसएलवी-एफ11 के जरिए लांच किया जाएगा।
  • जीसैट-7ए को इसरो द्वारा ही तैयार किया गया है। यह आठ साल तक सेवाएं देगा।
  • जीसैट-7ए से पहले इसी महीने इसरो ने अब तक का सबसे भारी भारतीय रॉकेट जीसैट-11 को फ्रेंच गुयाना से लांच किया था। जीसैट-11 की खास बात यह है कि वह 16 जीबी प्रति सेकंड की रफ्तार से डेटा भेजने में मददगार है।

नए साल में लांच किया जाएगा 'चंद्रयान-2'

चंद्रयान-2 भी लांच होने के लिए पूरी तरह तैयार है। चंद्रयान 2 को 31 जनवरी 2019 को लांच किया जाएगा। चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं। पहला है आर्बिटर जो चंद्रमा कि परिक्रमा करेगा। दूसरा हिस्सा है लैंडर-विक्रम जो कि चंद्रमा की सतह पर उतरेगा और तीसरा हिस्सा होगा रोवर जो चंद्रमा की सतह पर चलते हुए अलग-अलग परीक्षण करेगा।

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