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''GST'' रिटर्न में गलतियां सुधारने के नियम हुए आसान, इन्हें मिलेगी राहत

वित्त मंत्रालय ने वस्तु एवं सेवा कर ''जीएसटी'' के तहत कंपनियों और कारोबारियों को अपने मासिक रिटर्न जीएसटीआर-3 बी में गलतियों को दुरुस्त करने और कर देनदारी को समायोजित करने की अनुमति दे दी है।

वित्त मंत्रालय ने वस्तु एवं सेवा कर 'जीएसटी' के तहत कंपनियों और कारोबारियों को अपने मासिक रिटर्न जीएसटीआर-3 बी में गलतियों को दुरुस्त करने और कर देनदारी को समायोजित करने की अनुमति दे दी है।

इससे कारोबारी सही रिटर्न बिना जुर्माने के डर के जमा करा सकेंगे। इस छूट से कंपनियों-कारोबारियों को गलती को ठीक करने के बाद कर क्रेडिट के लिए दावा करने का मौका मिलेगा। उनसे शुरुआत में जीएसटी देनदारी की गणना के दौरान इस तरह की गलतियां हुई हैं।

कंपनियों को आंकलन में आ रही दिक्कत

देश में एक जुलाई, 2017 से जीएसटी लागू होने के बाद कंपनियों को उचित तरीके से कर देनदारी का आकलन करने में दिक्कत आ रही थी। उद्योग संगठन इस बारे में नियमों में ढील की मांग कर रहे थे और साथ ही अनुपालन के नियमों को सरल करने की मांग कर रहे थे।

आंकड़ों को रिपोर्ट करने का प्रावधान नहीं

इससे कंपनियों को आनलाइन कर रिटर्न दाखिल करने की नई प्रणाली को अपनाने में आसानी होगी। केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) ने हाल में फील्ड अधिकारी को भेजे पत्र में कहा था कि जीएसटीआर-3बी में पिछले महीनों के भिन्न आंकड़ों को रिपोर्ट करने का प्रावधान नहीं है।

प्रत्येक माह के 20वें दिन दाखिल करना होगा

इन आंकड़ों को शुद्ध आधार पर चालू महीने के मूल्य के साथ उचित टेबल में डाला जा सकता है। इसमें कहा गया है कि आउटपुट कर देनदारी या इनपुट कर क्रेडिट में समायोजन करते समय जीएसटीआर-3बी में किसी तरह की नकारात्मक प्रविष्टियां नहीं हो सकतीं। जीएसटीआर-3बी को कारोबारियों को प्रत्येक महीने के 20वें दिन दाखिल करना होता है।

कारोबारियों को राहत मिलेगी

इसमें पिछले महीने में दिए गए कर का ब्योरा होता है। ईवाई इंडिया के भागीदार अभिषेक जैन ने कहा कि इस सर्कुलर से उन कारोबारियों को राहत मिलेगी जो अपने जीएसटी रिटर्न फॉर्म में बदलाव करने में परेशानी झेल रहे थे।

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