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प्रवासी दिवस में PoK को भारत देगा न्योता! पाक के उड़ जाएंगे होश

प्रवासी भारतीय दिवस के मौके पर गिलगित-बाल्टिस्तान के प्रतिनिधियों को भी इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है

प्रवासी दिवस में PoK को भारत देगा न्योता! पाक के उड़ जाएंगे होश
नई दिल्ली. मोदी सरकार पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) के प्रति अपने रुख पर कायम रहते हुए एक और पहल की योजना बनाई है। अगले प्रवासी भारतीय दिवस के मौके पर गिलगित-बाल्टिस्तान के प्रतिनिधियों को भी इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है। इस दिशा में यह अपनी तरह की पहली कोशिश होगी।
सूत्रों की मानें तो इस प्रस्ताव पर गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच लंबी चर्चा हुई है। साथ ही इंटेलिजेंस और सुरक्षा एजेंसियों को भी दो साल पर होने वाले इस आयोजन के लिए तैयारी के निर्देश दिए गए हैं। इस बार का प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में अगले साल जनवरी में होना निर्धारित है।
Pok नेता जमील मकसूद ने इस प्रस्ताव पर कहा, 'अभी कुछ कहना जल्दबाजी है। यह भारत सरकार की संवैधानिक, राजनैतिक और नैतिक जिम्मेदारी है कि गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों को एकजुट किया जाए। पिछले 69 साल में Pok के लोगों के बारे में कभी भारत सरकार ने चिंता नहीं जाहिर की। अगर यह होता है तो निश्चित तौर पर इसका स्वागत किया जाना चाहिए।'
रिपोर्ट के अनुसार इस प्रस्ताव पर सरकार के शीर्ष स्तर पर विचार किया जा रहा है। साउथ ब्लॉक के उच्चस्तरीय सूत्रों की मानें तो सरकार इस कदम के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि पीओके के लोग भी भारतीय समुदाय का ही हिस्सा हैं। प्रवासी भारतीय दिवस पर पीओके के प्रतिनिधियों को आमंत्रण मोदी सरकार की कूटनीतिक चाल का ही हिस्सा है। कुछ दिन पहले केंद्र सरकार ने दो-टूक अंदाज में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान को जम्मू-कश्मीर का ही हिस्सा बताया था।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद दो बार गिलगित-बाल्टिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठा चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने पहले यह बात सर्वदलीय बैठक में कही और फिर 15 अगस्त को लाल किले से राष्ट्र को दिए अपने भाषण में भी इस मुद्दे को जोरदार अंदाज में उठाया।
हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि इस प्रस्ताव पर दो मत हैं। पहला पीएम मोदी के उस सख्त रुख की लीक पर ही है, जिसके मुताबिक पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान को घेरा जाना चाहिए। इस लिहाज से सरकार का यह कदम सटीक रहेगा। दूसरी तरफ, एक वर्ग की राय है कि अगर सरकार औपचारिक तौर पर यह कदम उठा लेती है तो पड़ोसी मुल्क के साथ रिश्ते और खराब हो सकते हैं।
सूत्रों का कहना है कि इससे पाकिस्तान को हुर्रियत नेताओं के साथ अपनी गतिविधि बढ़ाने का एक मौका मिल जाएगा। वहीं, इसकी भी आशंका है कि भारत के इस कदम के बाद अरुणाचल प्रदेश में चीन के लिए भी दखलअंदाजी का एक बहाना मिल जाएगा। गौरतलब है कि गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग अमेरिका, यूरोप समेत दुनिया के कई हिस्सों में रह रहे हैं।
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