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सरोगेसी बिल: गे और सिंगल्स को सरोगेसी की सुविधा नहीं

सरकार का मत है कि बच्चे के लिए माता-पिता की पहचान होना जरुरी है।

सरोगेसी बिल: गे और सिंगल्स को सरोगेसी की सुविधा नहीं
नई दिल्ली. बीते दिनों केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा पारित किए गए सरोगेसी बिल में सरकार कुछ बदलाव कर सकती है। सरोगेसी बिल में होमोसेक्सयुअल, गे और सिंगल्स को सरोगेसी सुविधाएं नहीं मिल पाएंगी। सरकार का मत है कि बच्चे के लिए माता-पिता की पहचान होना जरुरी है।
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का कहना है कि, " गे कपल्स की कोई एक पहचान नहीं होती है। बच्चे के लिए माता-पिता की एक पहचान होना जरुरी हैं। साथ ही मातृत्व सुविधाओं के लिए एक फैमिली कांसेप्ट है।"
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक विवाहित जोड़ों के लिए भी बिल में सरोगेसी की सुविधाओं का लाभ लेने के लिए शादी के कम से कम पांच साल पूरे होना जरुरी है। तो वहीं देश में रह रहे विदेशी लोग और लिव इन कपल्स भी सरोगेसी की सुविधा का लाभ नहीं उठा सकते हैं।
स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि, "सरोगेसी बिल को और प्रभावशाली बनाने के लिए सरकार ने एक ओपन प्लेटफार्म रखा है। जहां आप अपने सुझाव और विचार रख सकते हैं। मातृत्व सुविधाओं को बेहतर करने और इस बिल को और प्रभावी बनाने के लिए जनता के सुझावों के आधार पर बदलाव किए जा सकते हैं।"
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया, "सरोगेसी बिल के तीन प्रमुख उदेश्य हैं- एक सरोगेट मदर के शोषण पर रोकथाम लगाना, दूसरा बच्चे का सम्पूर्ण विकास और संरक्षण। इस बिल को पूर्णतः पारित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं इस मसले पर लोगों के सुझाव और विचारों पर भी चर्चा की जा रही है।
हालांकि सिंगल माता और पिता जो बच्चे के इक्छुक हैं, उन्हें बच्चा गोद लेने की सलाह दी गई है। वहीं शादी-शुदा लोग भी शादी के पांच साल बाद ही सरोगेसी की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।
इसके अलावा नड्डा का कहना है कि सरकार को सरोगेसी बिल में 'क्लोज रिलेटिव' के नियम' को सुनिश्चित करना होगा। इसमें कहा गया है कि सरोगेसी मदर के रूप में किसी करीबी रिश्तेदार से मदद ले सकते हैं। जैसे बहन और सिस्टर इन लॉ के न होने पर आप चचेरे-तहेरे रिश्तेदार से भी 'किराए की कोख' के लिए मदद मांग सकते हैं। हालांकि इसमें किसी फैमिली फ्रेंड को शामिल नहीं किया गया हैं।
गौरतलब है कि स्वास्थ्य मंत्री ने समलैंगिकों और गे कपल्स को सरोगेट मां के लिए नियमों में शामिल किए जाने की संभावना से इनकार कर दिया है। नड्डा ने कहा, इस मामले में हुई चर्चा और विचार-विमर्श यह बताते हैं कि "एक बच्चे को परिवार की जरूरत होती है" इसलिए हम एलजीबीटी समुदाय को सरोगेसी के नियमों में शामिल नहीं कर सकते हैं। भारत में आज भी समलैंगिक जोड़ों की कोई पहचान नहीं है।
इसके अलावा नड्डा ने सरकार के खिलाफ उठी सभी आलोचनाओं को खारिज कर दिया। जिनमें कहा गया था कि, "सरकार नागरिकों पर नैतिक मूल्यों को थोपने की कोशिश कर रही है। फिलहाल सरगेसी बिल को सरोगेट मदर के शोषण की रोकथाम करने के लिए बनाया गया है। वहीं कई देशों में सरोगेसी को बैन कर दिया गया है। बहरहाल भारत सरोगेसी के लिए एक उभरता हुआ केंद्र गया है। जहां 80% विदेशियों ने सरोगेसी की सुविधा का लाभ उठाया है।
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