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कांग्रेस से छीना जा सकता ''24, अकबर रोड'' वाला ऑफिस

करीब दो साल पहले सरकार ने इन बंगलों को खाली करने का नोटिस कांग्रेस को भेजा था

कांग्रेस से छीना जा सकता 24, अकबर रोड वाला ऑफिस
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नई दिल्ली. 24, अकबर रोड कांग्रेस का मुख्यालय है। यहां कांग्रेस का मुख्यालय 1976 से है। लेकिन हो सकता है कि आने वाले दिनों में इसका पता बदल जाएगा। केंद्र सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि कांग्रेस का मुख्यालय यहां रहेगा या नहीं।
इस प्रस्ताव में कांग्रेस से इन प्रॉपर्टीज के लिए जून 2013 से मार्केट रेट पर रेंट लेने की बात भी कही गई है। इस प्रस्ताव में 24 अकबर रोड समेत लुटियंस जोन के 3 और बंगले शामिल हैं।
करीब दो साल पहले मोदी सरकार ने इन बंगलों को खाली करने का नोटिस कांग्रेस को भेजा था क्योंकि लीज खत्म हो गई थी। वरिष्ठ अधिकारियों ने अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक्स टाइम्स को बताया कि शहरी विकास मंत्रालय के तहत आने वाला डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स कांग्रेस से बकाया वसूली के लिए नया नोटिस भेजने की योजना बना रहा है।
कांग्रेस को पार्टी ऑफिस की बिल्डिंग बनाने के लिए 9-ए राउज एवेन्यू में जमीन आवंटित की गई थी। राजनीतिक दलों को जमीन आवंटन की सरकारी नीति के तहत ऑफिस बनाने के लिए आवंटन के बाद तीन साल का वक्त मिलता है। लिहाजा कांग्रेस को जो चार बंगले लीज पर दिए गए थे, उन्हें उसे जून 2013 में खाली करना था।
एक अधिकारी ने बताया कि डायरेक्टरेट ने इस संबंध में जनवरी 2015 में कांग्रेस को नोटिस दिया था। उन्होंने बताया कि डायरेक्टरेट ने 26 अकबर रोड, 5 रायसीना रोड और C-II/109 चाणक्यपुरी के बंगलों के मद में बकाया का एक अनुमान तैयार कर लिया है। 24 और 26 अकबर रोड के बंगले टाइप VIII कैटेगरी के हैं, वहीं दो अन्य टाइप VI बंगले हैं।
डायरेक्टरेट के मुताबिक, टाइप VIII के मामले में मार्केट रेंट और सब्सिडाइज्ड मंथली रेंट में फर्क करीब 2 लाख रुपये महीने और टाइप VI के बंगले के मामले में यह अंतर 70,000 रुपये महीने का है। कांग्रेस इन चार बंगलों के लिए 26,000 रुपये से लेकर 77,000 रुपये प्रति महीने की रेंज में किराया देती है जबकि इनका मार्केट रेट 67,000 रुपये से 2.33 लाख रुपये महीने प्लस गार्डन चार्ज तक का है।
संपर्क किए जाने पर कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा ने कहा, 'पार्टी ऑफिस बनाने के लिए हमने 2018 तक का एक्सटेंशन हासिल किया है। हम उतना रेंट चुका रहे हैं, जितना जरूरी है।' वहीं, शहरी विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने इस दावे को खारिज किया। उन्होंने कहा, 'उन्होंने बिल्डिंग प्लान की मंजूरी के आधार पर तीन साल का एक्सटेंशन मांगा था। उन्हें एक्सटेंशन नहीं दिया गया था।' उन्होंने कहा कि कांग्रेस को नोटिस दिया जा चुका है कि वह तीन साल की अवधि पार कर चुकी है और उसे ब्याज के साथ मार्केट रेंट चुकाना होगा।
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