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GST संशोधन विधेयक को मिली मोदी सरकार की मंजूरी, पहले 5 साल केंद्र करेगा राजस्व नुकसान की भरपाई

जीएसटी के लागू होने के पहले पांच साल में होने वाले उनके राजस्व नुकसान की भरपाई की जाएगी।

GST संशोधन विधेयक को मिली मोदी सरकार की मंजूरी, पहले 5 साल केंद्र करेगा राजस्व नुकसान की भरपाई

नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) विधेयक में राज्यसभा की प्रवर समिति की सिफारिशों के अनुरूप संशोधनों को मंजूरी दे दी। इसके तहत देशभर में एक समान अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था लागू होने के बाद राज्यों को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई पांच साल तक की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार शाम हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में प्रवर समिति की राज्यों को मुआवजे संबंधी सिफारिश को मंजूरी दी गई।

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सरकार ने यह कदम इस विधेयक पर पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस तथा ओडिशा की बीजू जनता दल जैसी पार्टियों का राज्यसभा में समर्थन हासिल करने के लिए उठाया है। राज्यसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को बहुमत हासिल नहीं है। फिलहाल यह ऐतिहासिक संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पहले ही पारित हो चुका है। सूत्रों ने बताया कि कैबिनेट ने फैसला किया है कि जीएसटी दरों से ऊपर एक प्रतिशत अतिरिक्त कर लगाने की छूट तथा 'बैंड' दर लागू करने के तौर-तरीकों को नियम तय करते समय अंतिम रूप दिया जाएगा।

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बीजेपी के भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता वाली प्रवर समिति ने पिछले सप्ताह अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि जीएसटी की दर 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए और राज्यों द्वारा एक प्रतिशत अतिरिक्त कर वास्तविक बिक्री पर लगाना चाहिए और अंतर कंपनी भंडार या भंडार स्थानांतरण पर नहीं। जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक लागू होने के बाद ऐल्कॉहॉल को छोड़कर अन्य सभी उत्पादों पर उत्पाद और बिक्रीकर समाप्त हो जाएंगे। बता दें कि यह विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है, लेकिन राज्यसभा में अटका हुआ है।

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मुआवजे पर जिन संशोधनों को मंजूरी दी है उससे राज्यों को यह आश्वासन मिला है कि जीएसटी के लागू होने के पहले पांच साल में होने वाले उनके राजस्व नुकसान की भरपाई की जाएगी। सरकार का इरादा जीएसटी को 1 अप्रैल, 2016 से लागू करने का है। राज्यों के संसाधन बढ़ाने के लिए समिति ने सुझाव दिया है कि जीएसटी कानून में बैंड दर को परिभाषित किया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव में राज्यों को बैंड के दायरे में कुछ स्पेशलाइज्ड गुड्स और सर्विसेज पर अतिरिक्त कर लगाने की छूट होगी जिससे वे स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटा सकें।

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