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जीएम सरसों को जल्द मिल सकती है मंजूरी

सरकार की जीईएसी समिति ने दिखाई हरी झंडी

जीएम सरसों को जल्द मिल सकती है मंजूरी
नई दिल्ली. केंद्र सरकार की जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए शुरू की जा रही विभिन्न योजनाओं के तहत सरकार की एक समिति ने जेनेटिकली मॉडिफाइड यानी जीएम सरसों की व्यवसायिक खेती को हरी झंडी दी है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार जब तक इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं देती, तब तक इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सकेगा।

केंद्र सरकार द्वारा विशेषज्ञों की समिति द्वारा सौंपी रिपोर्ट में की गई सिफारिशों पर सरकार जनता से राय लेगी, जिसके बाद अंतिम निर्णय की मंजूरी के लिए सरकार पर्यावरण मंत्रालय के अधीन बायोटेक्नोलॉजी रेगुलेटर जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रूवल कमेटी (जीईएसी) के पास भेजेगी। यदि सभी रास्ते साफ कर लिए तो सरसों भारत की पहली जीएम खाद्य फसल होगी। दरअसल जनता के व्यापक विरोध के चलते विपक्ष इसका विरोध कर सकता है, इसलिए सरकार को विपक्ष को भरोसे में लेकर आगे बढ़ना चाहती है।

सूत्रों के अनुसार, देश में विकसित जीएम सरसों को सरकारी समिति और स्वतंत्र विशेषज्ञों ने पिछले सप्ताह इस तकनीकी मंजूरी दे दी थी। फसल के परीक्षण पर करीब एक दशक के डाटा की कई बार समीक्षा के बाद ऐसा किया गया। इस प्रक्रिया के बाद केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे के माध्यम से इस मामले को पीएमओ तक जाने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

उधर शुक्रवार को यहां बहुराष्ट्रीय बीज कंपनियों ने एक सवांददाता सम्मेलन के दौरान सरकार की समिति द्वारा जीएम सरसों को दी गई हरी झंडी देने पर कहा कि देश में आज भी किसान सरसो पुरानी तकनीकी के सहारे खेती करने को मजबूर है। वहीं कृषि योग्य भूमि घटती जा रही है और मौसम की अनिश्चितता कायम है।

लेकिन जीएम फसलों को लेकर राजनीतिक और जनता का विरोध जारी है। इसके पीछे आशंका जताई जा रही है कि जीएम फसलें खाद्य सुरक्षा और जैव विविधता को खतरे में डाल सकती हैं। जीएम सरसों को दिल्ली विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। इसमें तीन जींस का इस्तेमाल किया गया है। इन्हें पहले ही कनाडा, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में रेपसीड हाइब्रिड में शामिल किया जा चुका है।

जीएम सरसों पर समिति की मंजूरी ऐसे समय में आई, जब अमेरिकी बीज कंपनी मोन्सैंटो भारत में अपना कारोबार समेटने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने कहा है कि उसने अगली पीढ़ी के जीएम कॉटन बीजों की मंजूरी के लिए आवेदन को वापस ले लिया है। इसकी वजह नियमन संबंधी अनिश्चितताएं हैं।
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