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भारत से पहले इन पड़ोसी देशों ने बनाया ट्रिपल तलाक पर कानून

ट्रिपल तलाक बिल को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। अब इस बिल को कानूनी रूप देने के लिए संसद के दोनों सदनों में पास कराया जाएगा।

भारत से पहले इन पड़ोसी देशों ने बनाया ट्रिपल तलाक पर कानून

ट्रिपल तलाक बिल को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। अब इस बिल को कानूनी रूप देने के लिए संसद के दोनों सदनों में पास कराया जाएगा। 15 दिसंबर से शुरू हुए शीतकालीन सत्र में इसे पेश किया जाएगा।

केंद्र सरकार की ओर से तैयार विधेयक के मसौदे में कहा गया है कि एक बार में तीन तलाक गैरकानूनी होगा और ऐसा करने वाले पति को तीन साल जेल की सजा हो सकती है। किसी भी स्वरूप में दिया गया तीन तलाक (मौखिक, लिखित या इलैक्ट्रोनिक) गैर कानूनी माना जाएगा।
ट्रिपल तलाक पर भारत में अभी तक बहस जारी है, लेकिन क्या आपको पता है भारत के पड़ोसी देशों में तीन तलाक पर बहुत पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इन देशों में तीन तलाक के लिए कानून भी बनाए गए है। पाकिस्तान में तो 1956 से ही तीन तलाक पर प्रतिबंध है।
आइए विस्तार से जानते है इन देशों में तीन तलाक पर प्रतिबंध और कानून के बारे में।
पाकिस्तान में 1956 से तीन तलाक पर प्रतिबंध
तीन तलाक के मामले को लेकर भारत में जहां इतना हंगामा हुआ है, वहीं पड़ोसी देश पाकिस्‍तान में तीन तलाक का किस्‍सा काफी पहले खत्‍म कर दिया गया था। पाकिस्‍तान ने इस पर 1956 में ही प्रतिबंध लगा दिया था। 1955 में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री मोहम्मद अली बोगरा मामले के बाद सख्‍त कदम उठाए थे। पीएम ने सेक्रेटरी से शादी कर ली थी। इस पर पाकिस्तान में महिलाओं का गुस्‍सा फूट पड़ा था। इसके बाद यहां पर 1956 से तीन तलाक प्रतिबंध है।

बांग्‍लादेश भी भारत से आगे
बांग्‍लादेश भी इस मामले में भारत से आगे है। यहां भी महिलाओं के हितों को ध्‍यान में रखते हुए एक साथ तीन बार बोलकर दिया जाने वाला तलाक बैन है। यहां पर अगर किसी दंपत्‍त‍ि को तलाक लेना भी है तो वह तलाक-ए-बिद्दत के तहत नहीं बल्‍क‍ि एक पूरी प्रक्रिया निभाकर अलग होते हैं। बांग्‍लादेश में तलाक से पहले यूनियन काउंसिल के चेयरमैन को शादी खत्म करने से जुड़ा एक नोटिस देना अनि‍वार्य माना जाता है।

श्रीलंका में भी तीन तलाक पर कानून
भारत के पड़ोसी श्रीलंका में भी तीन तलाक पर बैन है। यहां मैरिज एंड डिवोर्स (मुस्लिम) एक्ट 1951 के तहत तलाक के लिए पति को एक मुस्लिम जज को नोटिस देना होता है। इस दौरान पहले घर परि‍वार और समाज के बड़े बुजुर्ग तलाक ले रहे दंपत्‍ति‍ को समझाने का प्रयास करते हैं। सुलह का हर संभव प्रयास होता है लेकिन सफल न होने पर एक मुसलमान जज और दो गवाहों के सामने 30 दिन बाद तलाक हो जाता है।
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