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मशहूर ऊर्दू लेखिका इस्मत चुग़ताई की पुण्यतिथि पर गूगल ने डूडल बनाकर इस तरह किया याद

मशहूर ऊर्दू साहित्य लेखिका इस्मत चुग़ताई की पुण्यतिथि पर गूगल आज स्पेशल डूडल बना कर सेलिब्रेट कर रहा है। इस्मत चुग़ताई भारत से उर्दू की एक लेखिका थीं।

मशहूर ऊर्दू लेखिका इस्मत चुग़ताई की पुण्यतिथि पर गूगल ने डूडल बनाकर इस तरह किया याद
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मशहूर ऊर्दू साहित्य लेखिका इस्मत चुग़ताई की पुण्यतिथि पर गूगल आज स्पेशल डूडल बना कर सेलिब्रेट कर रहा है। इस्मत चुग़ताई भारत से उर्दू की एक लेखिका थीं। उन्हें ‘इस्मत आपा’ के नाम से भी जाना जाता है।

इनकी जीवन शैली आज भी लोगों के लिए यादगार बनी हुई है। इस्मत चुग़ताई ने महिलाओं के सवालों को नए सिरे से उठाया और महिलाओं के हितों के लिए सहास के साथ काम किया था।

इस्मत चुग़ताई ऊर्दू लेखिका होने के साथ-साथ सिनेमा जगत में अपनी खास पहचान बनाने में कामयाब रही थी। सिनेमा जगत में रहते उन्होंने कई सारी फिल्मों में काम किया। इस्मत चुग़ताई की गरम हवा, जुनून, आरज़ू, द क्विल्ट, ज़िद्दी, माय ड्रीम्स ये प्रसिद्ध फिल्में हैं।

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इस्मत चुग़ताई को किताबें लिखने का भी शौक था इन्होंने द् क्लिट एड ऑदर स्टोरी-1990 द् क्ररोक्ड लाइन, लिफ्टिंग द् वीइल-2001, द् हर्ट ब्रइक्स फ्री एड द् वाईल्ड वन जैसी किताबें लिखी। उर्दू साहित्य की दुनिया में उनकी कहानी लिहाफ़ के लिए लाहौर हाईकोर्ट में उनपर मुक़दमा चला। जो बाद में ख़ारिज हो गया।

आपको बता दें कि इस्मत चुग़ताई का जन्म 15 अगस्त 1915 को उत्तर प्रदेश के बदायूं में हुआ था। इस लेखिका का निधन 24 अक्टूबर 1991 को हुआ। उनकी वसीयत के अनुसार मुंबई के चन्दनबाड़ी में उन्हें अग्नि को समर्पित किया गया।

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इस्मत चुग़ताई की चर्चित विवादित कहानी लिहाफ- लिहाफ कहानी जिसने भी पढ़ी वो इस कहानी का मुरीद हो गया। कहानी के संवाद को इस्मत चुगताई ने बखूबी लिखा। हालांकि 1942 में जब यह कहानी अदाब-ए-लतीफ में पहली बार छपी तो इस्मत को कोर्ट केस भी लड़ना पड़ा। इस कोर्ट केस में इस्मत की जीत हुई थी।

लिहाफ को हिंदुस्तानी साहित्य में लेस्बियन प्यार की पहली कहानी माना जाता है। लिहाफ कहनी के कुछ अंश इस तरह से हैं- जब मैं जाड़ों में लिहाफ ओढ़ती हूं, तो पास की दीवार पर उसकी परछाई हाथी की तरह झूमती हुई मालूम होती है और एकदम से मेरा दिमाग बीती हुई दुनिया के पर्दों में दौडने-भागने लगता है। न जाने क्या कुछ याद आने लगता है।

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