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इस मशहूर कवियत्री को गूगल ने दी डूडल में जगह, जानें इस कवियत्री से जुड़ी खास बातें

मशहूर सर्च इंजन गूगल अपने डूडल के माध्यम से मशहूर हस्तियों के साथ-साथ घटनाओं को भी जगह देता रहा है।

इस मशहूर कवियत्री को गूगल ने दी डूडल में जगह, जानें इस कवियत्री से जुड़ी खास बातें

मशहूर सर्च इंजन गूगल अपने डूडल के माध्यम से मशहूर हस्तियों के साथ-साथ घटनाओं को भी जगह देता रहा है। इसी क्रम में गूगल ने भारत की नामचीन कवियत्री एवं मलयाली लेखिका कमला सुरैया को जगह दी है। इनको कमला दास के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं इस महान कवियत्री से जुड़ी कुछ खास बातें...

घरेलू और यौन उत्पीड़न के खिलाफ करती रही प्रेरित

कमला दास का जन्म 31 मार्च, 1934 को केरल में मशहूर अखबार मातृभूमि के कार्यकारी संपादक वीएम नायर और नालापत बलमानी अम्मा के घर हुआ। कमला घरेलू और यौन उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष कर रही महिलाओं को प्रेरित करती थीं।

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20 से अधिक किताबें लिख चुकी हैं

उन्होंने 20 से अधिक किताबें लिखी हैं। हमारे देश में कविता में उनके बहुत बड़ा योगदान है। भारत के इतिहास में दास शायद पहिला लेखिका थीं जिन्होंने नारी विमर्श पर खुलकर अपने विचार रखे। वह हिन्दू परिवार में पैदा हुई थीं लेकिन 68 की उम्र में उन्होंने अपना धर्म परिवर्तन किया और इस्लाम धर्म अपनाया।

विवादास्पद रही आत्मकथा

कमला दास की आत्मकथा माई स्टोरी (मेरी कहानी) एक फरवरी 1977 को प्रकाशित हुई थी। यह किताब बहुत विवादास्पद रही और इस किताब का पंद्रह विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुआ। कविता की दुनिया में दास के योगदान को देखते हुए देश ने उन्हें 'मदर ऑफ मॉडर्न इंडियन इंग्लिश पॉयट्री' से नवाजा गया। उनकी रचनाएं आज भी महिलाओं के लिए आदर्श साबित हो रही हैं। बता दें कि कमला दास की जिंदगी पर जल्द ही मलयालम भाषा में 'आमी' फिल्म रिलीज होने वाली है।

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अंग्रेजी कविताएं भी रही प्रसिद्ध

उन्होंने मलयालम लघु कथाओं के साथ-साथ अंग्रेजी में भी कई कविताओं लिखी जो काफी प्रसिद्ध थीं। वह एक सिंडिकेटेड स्तंभकार भी थी। उन्होंने एक बार दावा किया था कि "कविता इस देश में नहीं बिकती है," लेकिन उनके स्पष्ट स्तंभ, जो महिलाओं के मुद्दों, बाल देखभाल से लेकर राजनीति तक काफी लोकप्रिय रहे।

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