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वित्तीय मजबूती के लिए मंदिरों के स्वर्ण भंडार पर सरकार की नजर, संचालकों की उड़ी नींद

कई मंदिरों के संचालकों ने इस योजना का विरोध किया है।

वित्तीय मजबूती के लिए मंदिरों के स्वर्ण भंडार पर सरकार की नजर, संचालकों की उड़ी नींद
नई दिल्ली. देश में बेकार पड़े 1,000 अरब डालर मूल्य के सोने को बाजार में लागने की सरकार की कोशिशों के बीच सभी की नजरें ऐसे सोने के बड़े बड़े भंडार रखने वाले मंदिरों पर है। लेकिन इनमें से कई मंदिरों के संचालकों को इस बात की आशंका है कि श्रद्धालुओं ये दान में प्राप्त स्वर्ण आभूषणों व वस्तुओं को सरकारी योजना के लिए गलाने से कहीं धार्मिक भावनाएं तो नहीं आहत होंगी। देशभर में विभिन्न स्थानों पर समृद्ध व प्रसिद्ध मंदिरों के अधिकारियों ने इस विषय में बातचीत में कहा कि सरकार की स्वर्ण मौद्रीकरण योजना में तत्काल भागीदारी करना उनके लिए शायद ही संभव हो पर कुछ मंदिरों के अधिकारियों ने कहा कि यह स्कीम गौर करने लायक है पर उन्हें इस पर अभी कोई पक्का निर्णय नहीं किया है। देवभूमि द्वारका में द्वारकाधीश मंदिर को इस पर निर्णय करना है, लेकिन मंदिर न्यास समिति के चेयरमैन एच.के. पटेल ने कहा कि स्कीम विचार करने योग्य है।
शिरडी के मंदिर के लिए अदालत रोडा
केरल में र्शी पद्मनाभस्वामी मंदिर और महाराष्ट्र में शिरडी साई बाबा मंदिर जैसे कुछ मंदिरों के लिए अदालत में चल रहे मामले रास्ते में रोड़ा बन रहे हैं। केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और राजस्थान में प्रमुख मंदिरों से इस स्कीम के प्रति ठंडी प्रतिक्रिया मिली है, जबकि आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और गुजरात में कुछ मंदिरों ने इसमें रुचि दिखाई है।
तिरूपति मंदिर विचार करेगा
तिरुमला तिरूपति देवस्थानम की उच्च स्तरीय निवेश समिति इस स्कीम के तहत सोना जमा करने के मुद्दे पर विचार के लिए जल्द ही बैठक करेगा। वहीं आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में कनकदुर्गाम्मा मंदिर की इस योजना में भागीदारी करने की कोई योजना नहीं है।
अंबाजी मंदिर ने मना किया
गुजरात में विभिन्न मंदिरों में प्रसिद्ध अंबाजी मंदिर ने फिलहाल इस स्कीम के लिए सोना जमा करने से मना कर दिया है, जबकि सोमनाथ मंदिर ने इस संबंध में एक प्रस्ताव तैयार किया है और अंतिम निर्णय मंदिर के ट्रस्टियों द्वारा किया जाएगा।
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