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स्वर्ण मौद्रिकरण योजना के तहत जमा हुआ 900 किलोग्राम सोना

तीन वर्ष के बाद किसी भी मध्यम अवधि की जमा और पांच साल बाद दीर्घकालीन जमा की निकासी की अनुमति होगी।

स्वर्ण मौद्रिकरण योजना के तहत जमा हुआ 900 किलोग्राम सोना

नई दिल्ली. सरकार स्वर्ण मौद्रिकरण योजना के तहत इस योजना के तहत ढाई महीनों में 900 किलोग्राम सोना पहले ही जमा कर चुकी है। जमाकर्ताओं को इस पर सालाना ढाई प्रतिशत ब्याज मिलेगा। संशोधित नियमों के तहत मध्यम व दीर्घकालीन सरकारी जमाओं के अंतर्गत परिपक्वता अवधि से पहले निकासी की अनुमति दी गई है।

बयान में कहा गया है, 'तीन वर्ष के बाद किसी भी मध्यम अवधि की जमा और पांच साल बाद दीर्घकालीन जमा की निकासी की अनुमति होगी।' इसके अलावा, स्वर्ण जमाकर्ता अब अपना सोना केवल संग्रह एवं शुद्धता जांच केन्द्रों (सीपीटीसी) के जरिए देने के बजाय सीधे रिफाइनर को दे सकते हैं।'

रिफाइनरियों के लिए शर्त हल्की की
योजना को और आकर्षक बनाने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो(बीआईएस) ने रिफाइनरों के लिए लाइसेंस देने की शर्त हल्की की है जिसके तहत रिफाइनिंग के अनुभव को तीन साल से घटाकर एक साल का किया गया है। बीआईएस ने अपनी वेबसाइट पर 13,000 से अधिक लाइसेंस प्राप्त ज्वेलर्स से इस योजना में सीपीटीसी के तौर पर काम करने के लिए आवेदन आमंत्रित किया है, बशर्ते कि उन्होंने बीआईएस के लाइसेंस प्राप्त रिफाइनरों के साथ गठबंधन कर रखा हो।
पूर्ण निकासी की सुविधा
वित्त मंत्रालय ने रविवार को कहा कि सरकार स्वर्ण मौद्रिकरण योजना के तहत सोने का संग्रह करने के लिए बैंकों को ढाई प्रतिशत कमीशन का भुगतान करेगी और जमाकर्ताओं को जमा किए गए सोने की परिपक्वता अवधि पूर्ण होने से पहले निकासी की अनुमति दी जाएगी।

आयात पर निर्भरता घटेगी
बयान में कहा गया, 'बैंकों को इस योजना के लिए ढाई प्रतिशत का कमीशन मिलेगा जिसमें संग्रह एवं शुद्धता जांच केन्द्रों के लिए देय शुल्क शामिल हैं।' स्वर्ण मौद्रिकरण योजना के तहत व्यक्तियों, परिवारों, मंदिरों को स्वर्ण आभूषण या सोने की बट्टी बैंकों या संग्रह एजेंटों के पास जमा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जमा किए गए सोने को बाद में घरेलू उद्देश्यों के लिए परिष्कृत किया जाएगा और इससे आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी।
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