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पिता करता रहा बेटी से दुष्कर्म, मां ने करवाया 8 बार अबॉर्शन

भाई ने भी नहीं दिया साथ, उठाया फायदा

पिता करता रहा बेटी से दुष्कर्म, मां ने करवाया 8 बार अबॉर्शन

लखनऊ. लखनऊ के आलमबाग थाना क्षेत्र में एक ऐसा केस सामने आया है कि जिसने ना सिर्फ इंसानियत को शर्मसार किया है बल्कि मां-बाप के पाक रिश्ते को भी मिट्टी में मिलाने का काम किया है। दरअसल, खबर यह है कि एक बाप ने खुद अपनी ही बेटी के साथ नौ साल से दुष्कर्म करता आ रहा था। इतना ही नहीं इस काम में लड़की की मां भी अपने पति का साथ दे रही थी।

दैनिक भास्कर के मुताबिक, इस दौरान लड़की 8 बार प्रेगनेंट हुई और हर बार उसकी मां डॉक्टर के पास ले जाकर उसका अबॉर्शन करा दिया करती थी। जब लड़की ने अपनी इस दुखभरी कहानी को बताना शुरु किया तो कहती है, मैं कभी भी 6 सितंबर 2013 की तारीख नहीं भूल सकती। इसी दिन मैं उस नर्क से निकली थी और मुझे न्‍याय मिला था।

पीडिता ने बताया कि इस तरह से गृह प्रवेश की रस्म ने उसकी जिंदगी ही बर्बाद करके रख दी। पीडिता ने बताया कि 18 जुलाई 1988 को जन्म के बाद 14 साल तक मैं अपनी नानी ने घर रही। जिसके बाद वो 2004 में अपने मां-बाप के घर आकर रहने लगी।

लड़की के मां-बाप ने नया घर बनवाया था। जिसके बाद गृह प्रवेश की परंपरा हुई। मुझे नहीं पता था इस परंपरा से मेरी जिंदगी नर्क बन जाएगी। उस दौरान मेरे पिता सदन सिंह की तबीयत खराब हो गई। डॉक्टर के बजाय तांत्रिक को बुलाया गया।

तांत्रिक ने कहा, पिता के ऊपर बेटी का साया है। इससे बचने के लिए मुझे अपने पिता से शारीरिक संबंध बनाने होंगे। सभी ने तांत्रिक की बातों पर यकीन कर लिया। मां ने मुझे पापा के साथ सोने के लिए कहा, लेकिन मैंने मना कर दिया। मैंने कहा, 'जहर दे दो, लेकिन ये काम करने के लिए न कहो।' मां नहीं मानी, मुझे पापा के कमरे में भेज दिया। फिर ये रोज का काम हो गया।

भाई ने भी नहीं दिया साथ, उठाया फायदा

पीडिता ने कहा, जिस दिन मैं सोने के लिए मना करती, उस दिन मां-पापा मिलकर मुझे पीटते थे। 2 साल ऐसे ही बीता। एक दिन भाई घर आया, वह बाहर रहकर पढ़ाई कर रहा था। मैंने उससे सारी बात बताई, लेकिन उसने भी कुछ करने के बजाय मेरे साथ रिलेशन बनाने शुरू कर दिए।

9 साल तक (3000 दिन) पापा और भाई ने मिलकर मेरा रेप किया। मां भी उनका साथ देती थी। मैं 8 बार प्रेग्नेंट हुई, लेकिन हर बार मां ने अबॉर्शन करा दिया।

ऐसे हुआ खुलासा

6 सितंबर 2013 को मैं बेरोजगारी भत्ते का फॉर्म भरने के बहाने घर से निकली और अखिलेश यादव के जनता दरबार पहुंच गई। सीएम साहब ने मेरे केस को संज्ञान में लेते हुए एसओ शिवा शुक्ला को जांच सौंप दी। इसके बाद मां-बाप और भाई पर केस दर्ज कर उन्‍हें जेल भेज दिया गया। साथ ही मुझे रानी लक्ष्मी बाई पुरस्कार से सम्मानित किया गया। नई आशा नाम के NGO ने मुझे गोद ले लिया, जहां ब्यूटिशियन का कोर्स कराया गया। महिला सम्मान प्रकोष्ठ ने मेरे लिए एक ब्यूटी पार्लर भी खुलवाया, जहां से आज मैं अच्‍छा-खासा कमा लेती हूं।

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