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''गो-रक्षकों'' को दिया जाएगा विशेष आइ-कार्ड

गुजरात गो सेवा आयोग ने फैसला लिया है कि अब सभी गोरक्षकों को प्रमाणित किया जाएगा।

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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान और सभी राज्यों से 'गो-रक्षकों' के लिए एक दस्तावेज तैयार करने की अपील की थी। इस अपील से प्रभावित होकर गुजरात गो सेवा आयोग ने फैसला लिया है कि अब सभी गोरक्षकों को प्रमाणित किया जाएगा और उनके पास अपना आई-कार्ड होगा। इससे 'गो-रक्षकों' और गो-रक्षा के नाम पर उपद्रव फैलाने वालों के बीच अंतर पता लग सकेगा।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और गुजरात गो सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ वल्लभ कठिरिया ने कहा, 'राज्यों को प्रधानमंत्री मोदी की दी गई सलाह को ध्यान में रखते हुए हमने गृह विभाग के साथ समन्वय में 'गो-रक्षक' अधिकृत करने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है। इससे असामाजिक तत्व जो गो-रक्षक के रूप में असामाजिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं उनकी पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने में आसानी होगी। वहां आसपास 500 पंजरापोल्स (पशु पाउंड) और गौशालाएं (गाय के आश्रय) हैं जिसे सीधे सरकार द्वारा वित्तीय सहायता मिल रही हैं और कुछ 2,000 संगठन कल्याणकारी न्यासों द्वारा चलाए जा रहे हैं। हमारा इन संगठनों से जुड़े व्यक्तियों को अधिकृत करने की योजना है। हम विरोधियों को बाहर करने के लिए इस तरह के सभी व्यक्तियों का पुलिस सत्यापन की सिफारिश करेंगे।
आपको बता दें की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बयान में कहा था कि आज असामाजिक तत्वों ने गाय के संरक्षण के नाम पर अपनी दुकानें खोल रखी है। जिसके बाद से गो सेवा आयोग ने गाय के संरक्षण के लिए मोदी की चिंताओं पर काम करने में लगा हैं। इसके अलावा आयोग ने प्लास्टिक की थैलियों में फेंके गए भोजन से गाय कि होने वाली मौतों को रोकने के लिए एक जागरूकता अभियान चलाने का फैसला भी किया है।
कठिरिया ने कहा, 'प्लास्टिक खाने के कारण हर साल सैकड़ों गायों की मौत हो जाती है। कई पंजरापोल्स और गौशालाओं में गायों के शरीर से प्लास्टिक को दूर करने के लिए सुविधाओं का विकास किया है। पशु चिकित्सा फार्मूले के द्वारा अब गायों को प्लास्टिक निगल लेने के बाद उसे बाहर उल्टी करवाने की सुविधा है। लोगों को गायों को प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के बारे में सूचित किया जाना चाहिए। प्लासिटिक की थैलियों में जब लोग गाय को खाना देता हैं तो उससे होने वाली मौतों को रोकने के लिए हम एक जागरूकता अभियान का शुभारंभ करेंगे।'
गुजरात गो सेवा आयोग के पास 210 करोड़ रुपए का बजट है और आने वाले वर्षों में और अधिक की मांग करने की योजना है।
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