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आर्थिक सुधार को लगेगा झटका, जीडीपी जा सकता है चार साल के निचले स्तर पर, ये हैं मुख्य वजह

जीडीपी का अनुमान लगाने वाली सरकारी एजेंसी ने अपने पहले अग्रिम अनुमान में यह बात कही है।

आर्थिक सुधार को लगेगा झटका, जीडीपी जा सकता है चार साल के निचले स्तर पर, ये हैं मुख्य वजह

कृषि और विनिर्माण क्षेत्र के खराब प्रदर्शन की वजह से देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष (2017-18) में 6.5 प्रतिशत के चार साल के निचले स्तर पर रहेगी। जीडीपी का अनुमान लगाने वाली सरकारी एजेंसी ने अपने पहले अग्रिम अनुमान में यह बात कही है।

सबसे कम होगी वृद्धि दर

नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में यह सबसे कम वृद्धि दर होगी। सरकारी एजेंसी केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने राष्ट्रीय आय 2017-18 का पहला अग्रिम अनुमान जारी करते हुए यह अनुमान लगाया है।

2015-16 से जारी है गिरावट

पिछले वित्त वर्ष 2016-17 में जीडीपी की वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रही थी। मोदी सरकार ने मई, 2014 में कार्यभार संभाला जिसके बाद जीडीपी की दर में वित्त वर्ष 2015-16 में जबरदस्त वृद्धि देखी गई, यह 8 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर थी।

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सीएसओ ने कहा, ‘‘चालू वित्त वर्ष में जीडीपी की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत पर आने का अनुमान है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 7.1 प्रतिशत रही थी।” वास्तविक सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) के आधार पर 2017-18 में वृद्धि 6.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो इससे पिछले साल 6.6 प्रतिशत थी।

नोटबंदी और जीएसटी रहे प्रमुख कारक

आर्थिक गतिविधियां नोटंबदी और उसके बाद माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के क्रियान्वयन से प्रभावित चालू वित्त वर्ष में आर्थिक गतिविधियों में गिरावट दिख रही है। सीएसओ के आंकड़ों के अनुसार कृषि, वन और मत्स्यपालन क्षेत्र की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में घटकर 2.1 प्रतिशत पर आने का अनुमान है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में यह 4.9 प्रतिशत थी।

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