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इस ''संपादकीय- लेख'' की वजह से गौरी लंकेश को मारी गई गोली!

13 सितंबर को इस पत्रिका का आखरी अंक साबित हुआ।

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पत्रकारिता की दुनिया में निडर और निष्पक्ष होकर अपनी आवाज उठाने वाली वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की गोली मारकर हत्या कर दी गई। गौरी लंकेश की हर हफ्ते 16 पन्नों की 'गौरी लंकेश पत्रिके' निकलती थी जिसमें वो अपना संपादकीय छापती थीं। 13 सितंबर को इस पत्रिका का आखरी अंक साबित हुआ।

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आइए जानते हैं वो कौन सा लेख था जिसे गौरी लंकेश की हत्या का कारण बताया जा रहा है। गौरी लंकेश ने अपने संपादकीय में लिखा की इस हफ्ते के इश्यू में मेरे मित्र डॉ वसु ने गोएबल्स की तरह भारत में फेक न्यूज बनाने की फैक्ट्री के बारे में लिखा हैौ। इस तरह की फैक्ट्री के मालिक मोदी भक्त हुआ करते हैं।
गौरी लंकेश ने लिखा आज में आपको झूठ की फैक्ट्री से होने वाले नुकसानों के बारे में बताने जा रही हूं। उन्होंने लिखा कि परसों गणेश चतुर्थी थी जिसके बाद सोशल मीडिया पर एक झूठ वायरल हुआ और इसे वायरल करने वाले संघ के लोग थे। उनका मूल लेख कन्नड भाषा में है हम यहां उसका अनुवाद लिख रहे हैं।
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