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गजब! हाई कोर्ट ने पूछा लहसून सब्जी है या मसाला, जानिए क्या है पूरा मामला

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि वह बताए कि लहसुन सब्जी है या मसाला...?

गजब! हाई कोर्ट ने पूछा लहसून सब्जी है या मसाला, जानिए क्या है पूरा मामला

जीएसटी को लेकर अब भी स्थितियां साफ नहीं हो पाई हैं। अब राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि वह बताए कि लहसुन सब्जी है या मसाला? राज्य सरकार से यह सवाल हाईकोर्ट में दायर एक पीआईएल पर किया गया है। सरकार को एक हफ्ते के अंदर हाईकोर्ट में जवाब दायर करना है।

दरअसल, राजस्थान सरकार के 2016 के नए कानून के मुताबिक लहसुन को अनाज मंडी में बेचा जाना चाहिए लेकिन 2016 से पहले तक इसे सब्ज़ी मंडी में बेचा जाता था। विक्रेताओं के मुताबिक सब्ज़ी मंडी में बेचने पर बिचौलिए छह प्रतिशत कमीशन देते हैं लेकिन अनाज मंडी में बिचौलिए केवल दो फीसदी कमीशन देते हैं, यही लहसुन बेचने वालों की परेशानी की वजह है।

विक्रेता संघ ने दायर की याचिका

जोधपुर के भदवासिया आलू, प्याज और लहसुन विक्रेता संघ द्वारा यह याचिका हाइकोर्ट में दायर की गई थी। हाईकोर्ट के इस सवाल के पीछे तर्क यह है कि अगर लहसुन सब्जी है तो किसान उसे सब्जी मार्केट में बेचे और अगर मसाला है तो उसे अनाज मार्केट में बेच सके।

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सब्ज व मसाला दोनों श्रेणी में रखा

सब्जी मार्केट में लहसुन बेचने पर टैक्स नहीं है जबकि अनाज मार्केट में लहसुन बेचने पर टैक्स लगता है। याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि सरकार ने लहसुन को सब्जी और मसाला दोनों श्रेणी में रख दिया है।

एक में टैक्स, एक में नहीं

सब्जी के रूप में लहसुन के बिकने पर जीएसटी नहीं लगता और मसाले के रूप में बेचा जाए तो जीएसटी लगता है। ऐसे में उन्हें लहसुन को किस श्रेणी में रखना बेचना है।

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एक्ट में संशोधन किसानों में हित में

अपर महाधिवक्ता श्याम सुंदर ने कोर्ट में कहा कि राज्य सरकार ने लहसुन के कंद अनाज मार्केट में बेचने के लिए राजस्थान कृषि उत्पादन बाजार एक्ट 1962 में अगस्त 2016 में संशोधन किया था। यह संशोधन किसानों के हित में था।

इसलिए शुरू हुई खुली बिक्री

अपर महाधिवक्ता ने बताया कि प्रदेश में लहसुन का भारी उत्पादन होने से इसकी कीमत गिर जाती है। वहीं सब्जी मार्केट में भी जगह कम होने से लहसुन सही कीमत पर नहीं बिक पाता है इसलिए सरकार ने किसानों को लहसुन खुले अनाज मार्केट में भी बेचने का आदेश दिया था।

बिचौलियों के कमीशन में अंतर

उन्होंने कहा कि अगर अनाज मार्केट में लहसुन बेचा जा रहा है तो भी उसमें कोई टैक्स नहीं लगता। इसके विपरीत उन्हें अनाज मार्केट में सिर्फ 2 फीसदी कमीशन बिचौलिये को देना पड़ता है जबकि सब्जी मार्केट में बिचौलियों का कमीशन 6 फीसदी है।

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क्या कहते हैं जानकार?

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में वेजिटेबल साइंटिस्ट डॉ प्रीतम कालिया के मुताबिक, लहसुन मूलत: सब्ज़ी है लेकिन इसका इस्तेमाल मसाले के तौर पर भी किया जाता है। इसको प्रोसेस कर मसाले के तौर पर ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।

डॉ प्रीतम के मुताबिक, लहसुन को बेचे जाने को लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए क्योंकि ये हमेशा से सब्ज़ी मंडी में ही बिकता आया है। अनाज मंडी में इसे बेचा नहीं जाता। हमेशा से इसे सब्ज़ी के साथ सब्ज़ी के तौर पर खाया जाता है।

ज़मीन के नीचे उगने वाली लहसुन आम तौर पर अक्तूबर-नबंवर के महीने में बोई जाती है और अप्रैल के महीने में इसे उखाड़ते हैं. लहसुन प्याज़ प्रजाति की ही सब्ज़ी है। दोनों को एक दूसरे का बहन-भाई कहा जाता है। इन्हें बल्ब की श्रेणी में रखा जाता है यानी प्याज़, लहसुन और ट्यूलिप के फूल एक ही प्रजाति के हैं।

डॉ. आलोक साम्बवानी कहते हैं कि इसके गुण की बात करें तो इसमें कई पोषक तत्व होते हैं। शरीर में इसकी बहुत कम मात्रा में जरूरत होती है, लेकिन शरीर में उन तत्वों की कमी होने पर गंभीर रोग हो सकते हैं।

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