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गंगा का पानी नहाने लायक तो क्या खेती लायक भी नहीं, सभी सैंपल हुए फेल

गंगा को पवित्र करने के लिए कई एक्शन कमेटियां काम कर रही हैं और केंद्र सरकार भी पानी की तरह पैसे बहाती है।

गंगा का पानी नहाने लायक तो क्या खेती लायक भी नहीं, सभी सैंपल हुए फेल
नई दिल्ली. उत्तर भारत की जीवनदायिनी और देश की सबसे पवित्र मानी जाने वाली गंगा नदी इतनी प्रदूषित हो चुकी है कि अब इसका पानी पीने तो क्या नहाने लायक भी नहीं बचा है। इतना ही नहीं ताजा सैंपलों के अनुसार जीवनदायिनी का पानी खेती के लायक भी नहीें बचा है। किसी समय में नीले जल के लिए पहचानी जाने वाली गंगा के पानी की जांच के लिए हरिद्वार, कानपुर व पटना सहित कई स्थानों से सैंपल लिए गए जिनमें सभी सैंपल फेल हुए हैं। सैंपल में सामने आया है कि पानी में औद्योगिक तेल की मात्रा इतनी बढ़ गई है कि मछलियों के लिए भी यह पानी कब्रगाह बन चुका है। यह खुलासा एक हिंदी न्यूज चैनल द्वारा कराई गई गंगाजल की जांच में हुआ है।
गंगा की इस हालत के लिए शहरों के नाले सीवर का पानी और आस्था के नाम पर किया जाने वाला प्रदूषण जिम्मेदार है। एक अनुमान के मुताबिक गंगा में प्रतिदिन करोड़ों लीटर नालों का पानी प्रवाहित किया जाता है, जिसके कारण गंगा जल की बजाय कीचड़ की नदी बनती जा रही है। सेंट्रल पोल्युशन कंट्रोल बोर्ड की मानें तो गंगा का जल अब जहर बन चुका है। गंगा के सर्वे में पहले ही सामने आ चुका है कि गंगा में स्नान करने से कैंसर हो सकता है।
हालांकि गंगा को पवित्र करने के लिए कई एक्शन कमेटियां काम कर रही हैं और केंद्र सरकार भी पानी की तरह पैसे बहाती है लेकिन गंगा की सेहत में कोई सुधार नहीं होता दिखाई दे रहा। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती पर इसकी निर्मलता वापस लाने का दारोमदार है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का पानी भी जहरीला है, वे इसके लिए पहले ही लोगों से वायदा कर चुके हैं कि गंगा को निर्मल बनाना उनकी पहली प्राथमिकता होगी।
नीचे की स्‍लाइड्स में पढ़िए, टेम्स की तरह लोगों के सामुहिक प्रयास से निर्मल हो सकती है गंगा-

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