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गंगा अभियान बनेगा दुनिया की नदियों का मॉडल, गंगा समेत सभी नदियों पर लागू होंगे मापदंड

देश का मॉडल उसी तरह दुनिया के देशों के लिए मॉडल बनेगा।

गंगा अभियान बनेगा दुनिया की नदियों का मॉडल, गंगा समेत सभी नदियों पर लागू होंगे मापदंड
नई दिल्ली. मोदी सरकार के गंगा की निर्मलता व अविरल धारा के साथ सभी नदियों को प्रदूषण मुक्त कराने का काम ऐसी आधुनिक तकनीक के जरिए शुरू किया जा रहा है, जिसका योगदान देश की बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने में भी हो सके। इस अभियान में सरकार का मकसद बिजली उत्पादन बढ़ाने के साथ पीने और सिंचाई के पानी की कमी को दूर करना भी है।
जल संसाधन, नदी विकास और गंगा सरंक्षण मंत्री सुर्शी उमा भारती ने शुक्रवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मोदी सरकार के शासन में गुजरात का मॉडल देश के सभी राज्यों के लिए मॉडल है और देश का मॉडल उसी तरह दुनिया के देशों के लिए मॉडल बनेगा, जिस प्रकार गंगा अभियान दुनिया की नदियों के लिए एक मॉडल के रूप में उभरकर सामने आएगा।
उन्होंने कहा कि गंगा और अन्य नदियों को प्रदूषण मुक्त और साफ करके ऐसी तकनीक के जरिए काम शुरू किया जा रहा है, जिससे देश में पानी, बिजली और सिंचाई जल के संकट को भी दूर किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि नदियों की सफाई और उनके पानी की अविरल व निर्मल धारा के प्रवाह को बनाए रखने के लिए निरंतर अभियान जारी रहना चाहिए, ऐसे प्रावधान लागू करने के लिए मापदंड बनाए जा रहे हैं जो सभी नदियों के लिए जारी रहेंगे।
उमा भारती ने पिछली सरकार की जल संबन्धी योजनाओं की तारीफ करते हुए कहा कि मंत्रालय में योजनाओं की छानबीन इस बात को इंगित करती हैं, लेकिन अभी तक इन योजनाओं को कार्यान्वित करने का प्रयास नहीं किया। इसलिए उनके मंत्रालय ने पुरानी योजनाओं को आधार मानकर नये प्रयासों को आयाम देना शुरू किया है। तकनीक के लिए अध्ययन के लिए कमेटियां बनाई गई हैं जिनकी रिपोर्ट आने के बाद उन्हीं आधार पर कार्य किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन या नदियों के लिए अभियान में पर्यावरण को उल्लंघन किए बिना और राज्यों की सहमति होने पर भी योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। इस दिशा में उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को इन योजनाओं से अलग रखने का निर्णय लिया गया है। गंगा और इसकी वितरिकाओं को एक छत के नीचे लाया गया है। गंगा के संरक्षण को अविरल धारा और इसकी पारिस्थियतिकीय एवं भूगर्भीय समग्रता को सुनिश्चित करने के लिए इसकी एकरुपता को पुन: स्थापित करने के लिए प्राथमिकता दी गई है।
उन्होंने कहा कि जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय जल संसाधन का कुशल उपयोग, समावेशन और स्थारयित्व सुनिश्चित करने के लिए तीन स्तरीय उद्देश्यों के साथ कार्य कर रहा है, जिसके लिए की गई पहल के अनुसार 140 मिलियन हेक्टेयर के कुल सिंचाई योग्य क्षेत्र में से 112.8 मिलियन हेक्टेरयर की सिंचाई क्षमता सृजित की गई है , जिसमें से वर्तमान में 88 मिलियन हेक्टेयर का उपयोग किया जा रहा है। वहीं सरकार की सीएडीडब्यू से एम स्कीम के माध्यम से 20.5 मिलियन हेक्टेयर कमान क्षेत्र विकसित किया गया है। ग्यारहवीं योजना के दौरान 0.92 लाख हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता के साथ 2100 जल निकायों का पुनरुद्धार किया गया है। हिमालयी घटक के अन्तर्गत 16 नदी सम्पर्कों और प्रायद्वीपीय घटक के तहत 14 नदी सम्पकर्कों के प्रस्ता व विचाराधीन हैं।
केन-बेतवा संपर्क का काम शुरू
नदियों को आपस में जोड़ने के लिए वर्ष 1982 में शुरू हुए कार्य पर नए सिरे से काम करने का फैसला किया गया है। मसलन वर्ष 2014 में केन-बेतवा की प्रथम नदी संपर्क परियोजना शुरू कर दी गई है। केन-बेतवा संपर्क परियोजना में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 221 कि.मी. लम्बीे सम्पटर्क नहर के साथ-साथ केन नदी पर एक बांध बनाया जाएगा, जिससे 6.35 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाएगी। वहीं 13.42 लाख लोगों को पेय जल आपूर्ति की जाएगी और 78 मेगावाट जल विद्युत का उत्पादन करने का लक्ष्य है।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, उमा भारती ने क्या कहा-
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