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भागवत बोले- हमारे पूर्वज आदिवासी, अफगान से लेकर श्रीलंका तक सबका डीएनए एक

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सामाजिक समरसता का जिक्र करते हुए कहा कि न कोई द्रविड़, न कोई आर्य और न ही कोई आदिवासी, अफगानिस्तान से लेकर श्रीलंका तक लोगों का डीएनए एक है।

भागवत बोले- हमारे पूर्वज आदिवासी, अफगान से लेकर श्रीलंका तक सबका डीएनए एक

रायपुर। स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने आज सामाजिक समरसता का जिक्र करते हुए कहा कि न कोई द्रविड़, न कोई आर्य और न ही कोई आदिवासी, अफगानिस्तान से लेकर श्रीलंका तक लोगों का डीएनए एक है। हमारे पूर्वज सब एक थे।

उन्होंने कहा कि आदिवासी ही हमारे पूर्वज हैं। हमारा सबसे बड़ा धर्म मानव धर्म है। हमें भारत को फिर से विश्व सिरमौर बनाने लोगों को हमारी संस्कृति से जोड़ना है। हमें अपना स्वार्थ त्यागकर गांव-गांव गली-गली व्यक्ति तैयार करना है। शाखा जाकर सत्व की शक्ति प्राप्त करनी है। कुछ समय शाखा के लिए निकालें। रोज के समय मे कुछ समय और रोज की कमाई का कुछ हिस्सा इसके लिए रख दें। कुछ ही वक़्त में शोषण मुक्त भारतवर्ष सजे धजे रुप में सम्पूर्ण विश्व पर शासन करता नजर आएगा।

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साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित संघ के सामाजिक समरसता कार्यक्रम में सोमवार को अपने उद्बाेधन में श्री भागवत ने तमिलनाडु के द्रविड़वाद का उदाहरण देते हुए कहा कि द्रविड़वाद के सहारे अन्ना द्रवई तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने, लेकिन जैसे ही चीन ने हिमालय पर हमला किया, अन्ना द्रवई सबसे पहले बोले कि हिमालय पर हमला मेरे देश पर हमला है। द्रविड़वाद, उत्तर हिंदी, आर्य या अलगाववाद की बात क्यों, हमारे पूर्वज एक थे अॉफगानिस्तान से लेकर श्रीलंका तक हमारा डीएनए एक है।
बतौर मुख्यअतिथि शामिल श्री भागवत ने एक उदाहरण देकर बताया कि एक आदिवासी के बच्चे को एक तेंदुआ उठा ले गया और उसे मारकर खा गया। सांत्वना देने वन विभाग के अधिकारी आदिवासी के घर आए तो आदिवासी ने कहा कि तेंदुआ जरूर तीन-चार दिन से भूखा होगा, तभी मेरे बच्चे को उठा ले गया। वर्ना यूं ही थोड़ी उठा ले जाता।
श्री भागवत ने कहा कि आदिवासी भोले होते हैं। वह अपने बच्चे की मौत के बजाए तेंदुए की भूख के बारे में सोच रहा था। अादिवासी हमारे पूर्वज हैं और यही हमारा मूल समाज है।
उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज हमेशा उदार रहे, जो भी दुनिया से यहां आए उसे बसने का अवसर देते गए, तब जनसंख्या बहुत कम थी। हमने दुनियाभर में भ्रमण किया। किसी को जीतने के लिए ज्ञान और विज्ञान का प्रसार कर सिरमौर बने। दुनिया के लोग केवल भारत पर विश्वास करते हैं कि भारत किसी देश की संपत्ति पर कब्जा नहीं करेगा। हमने कभी किसी को गुलाम नहीं बनाया। गौ रक्षा क्यों, ग्राम विकास क्यों, क्यों हम चाहते है कि समाज मे ऊँच नीच का विचार ना हो, ये सारी बातें संपूर्ण अस्तित्व की एकता से जुड़ा है। यह सत्य मेव जयते की भूमि है। छोटे-छोटे उपक्रमों से जागरण की आवश्यकता है।

हमारी संस्कृति देश का चेहरा

भारत में पला बढ़ा कोई भी हो, किसी भी धर्म-सम्प्रदाय का हो संतोष से ही सुख मिलेगा। खुद के लिए खूब बटोर रहे हो, लेकिन बांटोगे तभी सुख मिलेगा। अलगाव में सुख नहीं है, ये साइंस कहता है। हमें जोड़ने की बातों को देखना है। हमारे पूर्वज सब एक हैं। पूरी दुनिया समान पूर्वजों की वंशज है। आज विश्व बंधुत्व वाला भारत दुनिया में इकलौता देश है। धर्म से चेहरा देश का चेहरा नहीं हो सकता। वह समय के साथ बदलते रहता है। हमारे देश में 3 हजार 8 सौ से ज्यादा बोलिया हैं, इसलिए वह भी देश का चेहरा नहीं हो सकता। व्यापार एक साधन है, लेकिन मनुष्य जाति को बाजार जोड़ नहीं सकता, बाजार में स्वार्थ होता है, इसलिए यह भी चेहरा नहीं होगा। देश का चेहरा हमारी संस्कृति होनी चाहिए, संस्कृति से तात्पर्य संस्कार एवं सभ्यता से है। भारत के लोग ही संतोषी होते हैं और सोंचते है कि सुख बाहर नहीं अपने भीतर है।

सत्ता कृत्रिम, इधर-उधर भागती है

श्री भागवत ने कहा,भारत की एकता, अखंडता की आड़ में आने वाली कोई भी चीज हमारे सुख का नहीं बल्कि दुख का कारण बनेगी। जब हम देश के प्रति निस्वार्थ थे, तब कोई संकट नहीं आया। जब-जब हम स्वार्थी हुए देश में संकट आया। आज दुनिया का सिरमौर देश कर्ज में डूब गया। ‎लोगों की गाली सुनकर हमें लोगों को संस्कृति से जोड़ना है। हम बगैर किसी को डराए धमकाए दुनिया का सिरमौर बनेंगे। उन्होंने केन्द्र और राज्य की भाजपा सरकारों को आगाह करते हुए कहा कि सत्ता कृत्रिम चीज है जो बदलती रहती है, इधर से उधर भागती है।

टेकाम ने कहा, आदिवासियों को नक्सली बताया जा रहा

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे छत्तीसगढ़ गोड़ समाज के उपाध्यक्ष माेहन सिंह टेकाम ने कहा कि “मोहन भागवत जी से निवेदन करूँगा कि संघ के जरिए जिस तरह से देशभर में काम किया जा रहा है उसी तर्ज पर बस्तर जैसे क्षेत्रों के लिए भी चिंतन मनन किया जाए।” उन्होंने कहा छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यहां गोंड जनजाति का राज रहा है। जीता जागता इतिहास रानी दुर्गावती के रूप में हमारे सामने है। देश की अस्मिता को बचाने समाज हमेशा आगे आकर लड़ाई लड़ता रहा है, लेकिन प्रदेश में आदिवासी समाज को नक्सली के नाम पर प्रताड़ित किया जा रहा है। वनांचल में बड़ी संख्या में धर्मांतरण भी हो रहा है।


सौदान समेत कई मंत्री शामिल हुए

मंच पर प्रांत संघचालक बिसराराम यादव एवं महानगर संघचालक उमेश अग्रवाल मौजूद थे। श्री भागवत को सुनने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री सौदान सिंह, प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, रामविचार नेताम, नंदकुमार साय, पवन साय, मंत्रीगण समेत बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए।
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