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अपनी राय जाहिर करने की स्वतंत्रता किसी लोकतांत्रिक संस्था की जीवनरेखा- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपनी राय जाहिर करने की स्वतंत्रता किसी भी लोकतांत्रिक संस्था की जीवनरेखा है।

अपनी राय जाहिर करने की स्वतंत्रता किसी लोकतांत्रिक संस्था की जीवनरेखा- सुप्रीम कोर्ट
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उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि अपनी राय जाहिर करने की स्वतंत्रता किसी भी लोकतांत्रिक संस्था की जीवनरेखा है, लेकिन यह साफ कर दिया कि वैसे प्रदर्शन जो सार्वजनिक अशांति पैदा करते हैं, वे संविधान द्वारा प्रदत्त वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत नहीं आते हैं।

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शीर्ष अदालत ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद19 वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से संबंधित है जो नागरिकों को कुछ सर्वाधिक महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार प्रदान करता है।

न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने कहा, ‘‘ वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के साथ शांतिपूर्ण और बिना हथियार के एकत्र होना ऐसे अधिकार हैं जो कई अवसरों पर प्रदर्शनों में परिलक्षित होते हैं। अपनी राय जाहिर करने की स्वतंत्रता किसी भी लोकतांत्रिक संस्था की जीवनरेखा है।'

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शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी अपने उस फैसले में की जिसके जरिये गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के पूर्व नेता बिमल गुरुंग को गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान करने की मांग करने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी गयी।

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