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सरकार का नया कानून: बैंक में पैसे डूबने की बात पर जेटली ने दिया ये जवाब

फाइनेंशियल रिजॉल्‍यूशन एंड डिपॉजिट बिल 2017 शीत सत्र में संसद में पेश किया जा सकता है

सरकार का नया कानून: बैंक में पैसे डूबने की बात पर जेटली ने दिया ये जवाब

सरकार ने फाइनेंशियल रिजॉल्‍यूशन एंड डिपॉजिट बिल (एफआरडीआई) से जुड़ी लोगों की चिंताओं को दूर करने की कोशिश की है। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि बैंकों के डिपॉजिटर्स के वर्तमान सभी अधिकार न सिर्फ सुरक्षित रहेंगे, बल्कि उन अधिकारों को और मजबूत किया जाएगा।

उन्‍होंने मुख्‍य धारा की मीडिया के साथ सोशल मीडिया पर चल रही तमाम खबरों और आशंकाओं को निराधार करार देते हुए कहा कि इस तरह की सभी बातें अफवाह हैं।

जेटली के ट्वीट के बाद इकोनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी एससी गर्ग ने भी कहा कि एफआरडीआई बिल में किसी तरह की ऐसी कोई तब्‍दीली नहीं की जा रही है, जिससे बैंकों में जमा लोगों के पैसों पर किसी तरह की आंच आए।

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उन्‍होंने साफ कहा कि पीएसयू बैंकों में जमा लोगों के पैसे की गारंटी सरकार देती है, इसलिए उसकी सुरक्षा में कोई कमी नहीं आ सकती है। इससे पहले खबर थी कि केंद्र सरकार ने बैंकिंग रिफॉर्म प्रक्रिया के क्रम में 2017 के जून में एक ऐसे बिल को स्‍वीकृति दी है, जिसके तहत बैंकों में जमा लोगों के पैसे डूब सकते हैं।

कहा गया था कि इस बिल में ऐसे प्रावधान हैं कि अगर कोई बैंक डूबने की कगार पर है तो उसमें जमा लोगों के पैसे वापस नहीं दिए जाएंगे। इस प्रावधान की जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल होते ही बड़ी संख्‍या में लोगों ने चिंता जतानी शुरू कर दी थी।

‘बेल-इन’ पॉवर्स

खबर के मुताबिक, सरकार अगर इस प्रावधान को लागू करती है तो इससे रिजॉल्‍यूशन कॉरपोरेशन नामक प्रस्‍तावित संगठन के पास काफी अधिक अधिकार होंगे। इस अधिकार को ‘बेल-इन’ पॉवर्स कहा जा रहा है और इस संगठन को डूबते बैंक को उबारने की जिम्‍मेदारी होगी।

इस कॉरपोरेशन की स्‍थापना फाइनेंशियल रिजॉल्‍यूशन एंड डिपॉजिट बिल के तहत की जाएगी और किसी बैंक के डूबने की स्थिति में यह ‘बेल-इन’ पॉवर्स का यूज कर सकता है।

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