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शादियों में खाने की बर्बादी रोकने के लिए सरकार उठाएगी कदम, मेहमानों की संख्या कम करने पर विचार

दिल्ली सरकार ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि वह खर्चीली शादियों में मेहमानों की संख्या सीमित करने और ऐसे समारोहों में खानपान की बर्बादी रोकने के लिये कैटरिंग व्यवस्था को संस्थागत बनाने की नीति तैयार करने पर विचार कर रही है।

शादियों में खाने की बर्बादी रोकने के लिए सरकार उठाएगी कदम, मेहमानों की संख्या कम करने पर विचार
दिल्ली सरकार ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि वह खर्चीली शादियों में मेहमानों की संख्या सीमित करने और ऐसे समारोहों में खानपान की बर्बादी रोकने के लिये कैटरिंग व्यवस्था को संस्थागत बनाने की नीति तैयार करने पर विचार कर रही है।
न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर की अध्यक्षता वाली पीठ को दिल्ली के मुख्य सचिव विजय कुमार देव ने बताया कि न्यायालय के पांच दिसंबर के आदेश में उठाये गये इस मुद्दे पर चर्चा की गयी है। इस आदेश में न्यायालय ने शादी समारोहों में खाने की बर्बादी और पानी के दुरूपयोग पर चिंता व्यक्त की थी।
न्यायालय में मौजूद देव ने कहा कि सरकार न्यायालय की सोच की दिशा में ही काम कर रही है और उसका प्रयास दिल्ली की जनता के हितों में संतुलन कायम करना है। देव ने कहा कि उन्होंने इस मामले में उपराज्यपाल से चर्चा की है और ऐसा लगता है कि उपराज्यपाल के साथ इस विषय पर सहमति है।
उन्होंने कहा कि एक ओर हम मेहमानों को नियंत्रित कर सकते हैं और दूसरी ओर खाद्य सुरक्षा एवं मानक कानून के तहत कैटरर और बेसहारा लोगों को भोजन उपलब्ध कराने वाले गैर सरकारी संगठनों के बीच एक व्यवस्था बनायी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि प्राप्त सूचना के अनुसर दिल्ली में शादी विवाह समारोहों में बचा हुआ भोजन बर्बाद हो जाता है या फिर बचा हुआ भोजन कैटरर बाद में होने वाले शादी समारोहों में इस्तेमाल करते हैं। पीठ ने देव से कहा कि पहले इस मामले में एक नीति तैयार की जाये उसके बाद दूसरा बड़ा कदम ठीक से इस पर अमल करना होगा।
दिल्ली सरकार के वकील ने नीति तैयार करने के लिये आठ सप्ताह का समय देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में सारे कैटरर के पास लाइसेंस है और वे खाद्य सुरक्षा एवं मानक कानून के तहत पंजीकृत हैं। पीठ ने मुख्य सचिव को अगले छह सप्ताह के भीतर इस मामले में नीति तैयार करने का आदेश दिया और इसे पांच फरवरी को सुनवाई के लिये सूचीबद्ध कर दिया।
पीठ ने कहा कि मुख्य सचिव कह रहे हैं कि समारोहों में बासी खाने के सामान का इस्तेमाल होता है। ऐसे समारोहों में परोसे जाने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता के निरीक्षण की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
पीठ ने अपने आदेश में इस तथ्य का भी जिक्र किया कि मुख्य सचिव ने न्यायालय को सूचित किया है कि विवाह समारोहों में खाद्य पदार्थो की गुणवत्ता बनाये रखने के लिये एक रणनीति पर काम किया जा रहा है।
सुनवाई के दौरान उस मोटल से संबंधित मामले पर भी विचार किया गया जिसे अग्नि सुरक्षा उपायों का पालन नहीं करने के कारण स्थानीय निकाय ने नोटिस दिया है। पीठ को दिल्ली सरकार के वकील ने बताया कि दिल्ली अग्निशमन सेवा ने हाल ही में इस मोटल का निरीक्षण किया था जिसके अग्नि सुरक्षा उपायों में कुछ खामियां मिली थीं।
मोटल के वकील ने कहा कि उसने 11 आपत्तियों में से नौ पर अमल कर दिया है और शेष दो आपत्तियों पर काम चल रहा है। पीठ ने कहा कि आप अपना समय लीजिये। हम लोगों की जान जोखिम में नहीं डाल सकते। हालांकि पीठ ने मोटल के वकील के अनुरोध पर 15 दिसंबर को मोटल की सील हटाने का निर्देश दिया ताकि दो तीन दिन में काम पूरा किया जा सके।
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