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CRPF कमांडेंट चेतन चीता समेत 5 पांच जवानों को अदम्य साहस के लिये कीर्ति चक्र

कीर्ति चक्र वीरता के लिये दिया जाने वाला दूसरा शीर्ष पदक है।

CRPF कमांडेंट चेतन चीता समेत 5 पांच जवानों को अदम्य साहस के लिये कीर्ति चक्र

सैन्य अभियानों में अदम्य साहस और पराक्रम के लिये हर साल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिये जाने वाले कीर्ति चक्र के लिये इस साल पांच जवानों को चुना गया है। इनमें से तीन को यह सम्मान मरणोपरांत प्रदान किया जायेगा।

रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इस साल कीर्ति चक्र के लिये चुने गये जवानों में दो जवान आतंकरोधी अभियानों में अपने प्राणों की आहुति देने वाले भी शामिल हैं।

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गोरखा राइफल्स के हवलदार गिरिस गुरुंग, नगा रेजीमेंट के मेजर डेविड मनलुन और सीआरपीएफ की 49 बटालियन के कमांडेंट प्रमोद कुमार को इस साल मरणोपरांत कीर्ति चक्र दिया जायेगा।

इनके अलावा गढ़वाल राइफल के मेजर प्रीतम सिंह कुन्वार और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी चेतन कुमार चीता को भी कीर्ति चक्र के लिये चुना गया है। कीर्ति चक्र वीरता के लिये दिया जाने वाला दूसरा शीर्ष पदक है।

राष्ट्रपति रामनाथ कांविंद ने इस साल सैन्य और अर्धसैन्य बल के जवानों को दिये जाने वाले कुल 112 वीरता पुरस्कारों की सूची को मंजूरी प्रदान की है। हालांकि सरकार ने इस साल वीरता सर्वोच्च सम्मान अशोक चक्र के लिये किसी नाम की घोषणा नहीं की है।

राष्ट्रपति ने पांच कीर्ति चक्र, 17 शौर्य चक्र, 85 सेना पदक(वीरता), तीन नौसेना पदक और दो वायु सेना पदक के विजेताओं की सूची को मंजूरी प्रदान की है।

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जख्मी होने पर भी चेतन चीता ने 16 राउंड फायर किए

राजस्थान के कोटा के रहने वाले चेतन की उम्र 45 साल है। वे सीआरपीएफ की 45 बटालियन के कमांडेंट हैं। 14 फरवरी को कश्मीर के बांदीपोरा में एनकाउंटर के दौरान चेतन घायल होने के बावजूद आतंकियों से लड़ते रहे।

गोली लगने के बाद 16 राउंड फायर किए। मुठभेड़ के दौरान लश्कर के कमांडर अबु मुसैब को मार गिराया। इस मुठभेड़ में तीन जवान भी शहीद हुए थे।डॉक्टरों के मुताबिक, आतंकियों से लड़ते हुए चेतन को आठ गोलियां लगी थीं।

इनमें से तीन गोलियों ने उन्हें जख्मी कर दिया था। पांच गोलियां बुलेट प्रूफ जैकेट में फंस गई थीं। एक गोली दाहिने हाथ, दूसरी बाएं हाथ में लगी और तीसरी जांघ से होते हुए कूल्हे और रेक्टम को जख्मी कर गई थी।

उन्हें ग्रेनेड के स्प्लिन्टर भी लगे थे। स्प्लिन्टर से जख्मी होने के कारण दाईं आंख की रोशनी चली गई। एम्स के ट्रॉमा सेंटर में 51 दिन बिताने के बाद बाहर निकलते वक्त चेतन कमजोर तो दिख रहे थे, पर उनके इरादे बुलंद थे।

जब उनसे पूछा गया कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं, तो चेतन ने तपाक से कहा- इट्स रॉकिंग।

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