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नमामि गंगे: डॉल्फिन मछलियों पर उलझन में सरकार!

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने दिये जांच के आदेश

नमामि गंगे: डॉल्फिन मछलियों पर उलझन में सरकार!
नई दिल्ली. केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘नमामि गंगे’ मिशन में गंगा नदी से विलुप्त होती डॉल्फिन मछलियों और उनके अंधेपन को लेकर केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा सरंक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती और उनका जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा सरंक्षण मंत्रालय अलग-अलग तर्क देकर आमने सामने नजर आ रहा है। संसद में दिये गये उमा भारती के बयान को मंत्रालय द्वारा नकारने पर मिशन ने जांच कराने के भी आदेश दे दिये हैं।
दरअसल केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा सरंक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने गत मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में नमामि गंगे परियोजना पर सांसदों के सवालों के जवाब में स्पष्ट किया था कि गंगा की निर्मलता को सरकार किसी लैब से प्रमाणित नहीं कराएंगे, बल्कि जो जल जंतु जहां होना चाहिए, यदि वह वहां होगा तो वही गंगा की जीवन शक्ति का प्रमाण होगा।
उन्होंने कहा कि हमने नदी के जीव-जंतुओं के बारे में केंद्रीय अंतदेर्शीय मत्स्य पालन अनुसंधान संस्थान के साथ करार करके एक परियोजना शुरू की है। सुश्री भारती ने कहा कि गंगा में डॉल्फिन की प्रजाति भी प्रदूषण के कारण अंधी हो गई हैं। इसलिए अब गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के बाद एक बार फिर आंखों वाली डॉल्फिन की प्रजाति को गंगा में छोड़ा जाएगा। यदि वह फिर अंधी नहीं हुई तो हम यह माना जाएगा कि अब गंगा की जीवंतता यथावत हो गई है। इसके विपरीत डॉल्फिन मछलियों के बारे में एक आरटीआई के तहत उनके मंत्रालय ने केंद्रीय मंत्री उमा भारती के संसद में किये गये इन दावों को पूरी तरह गलत करार दे दिया है।
मंत्रालय ने क्या कहा
सूचना के अधिकार के तहत मंत्रालय से उमा भारती के डॉल्फिन मछलियों के अंधेपन के बारे में किये गये दावों के संदर्भ में पूछा गया है कि क्या इस बारे में में कोई वैज्ञानिक अध्ययन कराया गया है जिसमें उनके अंधेपन का कारण गंगा नदी का प्रदूषण है। इस पर जल संसाधन मंत्रालय ने कहा कि इस बारे में अभी तक कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हुआ है और न ही मंत्रालय के पास ऐसे कोई वैज्ञानिक आधार या प्रमाण नहीं है कि डॉल्फिन मछलियां प्रदूषण के कारण ही अंधी हुई हैं।
हलकान मंत्रालय का स्पष्टीकरण
सूत्रों के अनुसार संसद में उमा भारती के दावे और फिर आरटीआई के जवाब को लेकर जिस प्रकार से तर्को में विरोधाभास सामने आया तो यह मीडिया की सुर्खियां भी बनने से नहीं चूक सका। इस पर केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने अपने अधिकारियों का जवाब तलब किया तो मंत्रालय को स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा। मंत्रालय के स्पष्टीकरण के अनुसार मंत्री सुश्री उमा भारती नियमित आधार पर गंगा से संबंधित विभिन्न गतिविधियों की समीक्षा करती हैं। ऐसी ही एक समीक्षा के तहत गंगा के जल-जीवन का भी जायजा लिया गया था,जिसमें इस समीक्षा के दौरान एक विशेषज्ञ ने जल-जीवन के बारे में एक प्रस्तुतिकरण दिया। इस प्रस्तुतिकरण में सुश्री भारती को जानकारी दी गई थी, कि गंगा की डॉल्फिन मछलियां नदी के प्रदूषण के कारण अंधी हो रही हैं और संसद में दिया गया उनका यह बयान तथ्यात्मक रूप से सही है।
गंगा मिशन ने दिये जांच के आदेश
केंद्रीय मंत्री और मंत्रालय के तर्क में विरोधाभास के बाद राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने जांच के आदेश दे दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरटीआई का जवाब देते समय इस तथ्यात्मक सूचना का उल्लेख क्यों नहीं किया गया। जबकि उमा भारती का यह भी दावा है कि गंगा में स्नोट्राउट, गोल्डन फिश और हिल्सा जैसी मछलियां धीरे-धीरे खत्म हो गई हैं, जबकि हिल्सा मछली चंबल कहे जाने वाले फरक्का बैराज तक आती थी। इससे प्रभावित हुए लाखों मछुआरों के रोजगार की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने फैसला किया है कि सरकार फरक्का बैराज में फिश लैडर का निर्माण करेगी, ताकि हिल्सा मछली बैराज में चंबल तक वापस आ सके और मछुआरों को रोजगार मिल सके।
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