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नहीं जानते तो जान लीजिए भारतीय कानून में इन मौकों पर मर्डर करने पर नहीं होगी सजा

जैसे कृत्य के लिए भारतीय संविधान में कठोर सजा का प्रावधान है लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ ऐसे भी मौके हैं जब मर्डर करने पर आपको कोई सजा नहीं होती।

नहीं जानते तो जान लीजिए भारतीय कानून में इन मौकों पर मर्डर करने पर नहीं होगी सजा

आए दिन हमे हत्या, अपहरण और रेप की घटनाएं सुनने को मिलती है। ये घटनाएं दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। हत्या जैसे कृत्य के लिए भारतीय संविधान में कठोर सजा का प्रावधान है लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ ऐसे भी मौके हैं जब मर्डर करने पर आपको कोई सजा नहीं होती। तो आइए जानते हैं ऐसी कौन सी परिस्थिति है जब हत्या करने पर सजा का प्रावधान नहीं है...

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आत्मसुरक्षा में हत्या

भारतीय दंड संहिता में धारा 103 और 104 के तहत यदि कोई व्‍यक्‍ति अपनी आत्‍मरक्षा के लिए किसी का मर्डर करता है तो उसे हत्या नहीं कहा जाता है। कानून के अनुसार, अभियुक्त का मर्डर करने का कोई इरादा नहीं था, उसने खुद को खतरे से सुरक्षित रखने के लिए ऐसा किया।

तर्कसंगत आत्मरक्षा के लिए हत्या

अगर आप किसी व्यक्ति के साथ हैं और आपको महसूस हो रहा है कि वह व्यक्ति आपको नुकसान पहुंचाने वाला है या पहुंचा सकता है तो ऐसी स्थिति में आप अपनी आत्‍मसुरक्षा के लिए उस व्यक्ति पर हमला कर हत्या कर सकते हैं।

महिला सुरक्षा के लिए

अगर किसी लड़की या महिला को लग रहा है कि उस पर कोई व्यक्ति हमला करने वाला है या उसके साथ रेप करने वाला है तो उस दौरान महिला अपनी आत्‍मसुरक्षा के लिए उस व्यक्ति की जान तक ले सकती है। ऐसे केस में महिला को किसी प्रकार की कोई सजा नही होगी।

महिला से रेप के दौरान

अगर कोई व्यक्ति महिला से रेप कर रहा है और महिला इस दौरान पुरुष के चेहरे पर काट ले तो महिला इसके लिए दोषी नहीं है, यदि महिला के काटने से उस पुरुष की मौत भी हो जाती है तो भी वह मर्डर नहीं आत्मसुरक्षा के लिए उठाया गया एक कदम कहलाता है।

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अपहरण की कोशिश के दौरान हत्या

अगर कोई व्यक्ति या गिरोह किसी का अपहरण करने की कोशिश कर रहा है और इस दौरान पीड़ित अपने बचाव में अपहरणकर्ता पर हमला कर उसकी जान ले ले तो कानून इसे हत्या नहीं मानता।

एसिट अटैक से बचने के लिए हत्या

अगर किसी महिला को शक है कि कोई उसपर एसिट फेकने वाला है तो इस दौरान महिला अपनी रक्षा के लिए आरोपी पर अटैक कर सकती है। हमले के दौरान अगर हमलावर की मौत हो जाए तो कोर्ट इसे हत्या नहीं मानेगा।

संपत्ति की सुरक्षा के लिए हत्या

किसी व्यक्ति को अगर यह डर सता रहा है कि कोई इंसान या अन्य उसकी संपत्ति को किसी तरह का नुकसान पहुंचा सकता है या छीन सकता है तो मालिक को संपत्ति की सुरक्षा का अधिकार हासिल है। यदि ऐसी हालत में कोई हमला हुआ और मालिक ने संपत्ति को बचाने के लिए हत्या की तो कोर्ट इस हत्या को हत्या नहीं मानेगा।

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