Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

GST के नए नियम से करदाता आशंकित, कारोबार सुगम बनाने के लिए की मांग

केंद्रीकृत इकाई जिसमें कर्नाटक और गोवा की 58 बड़ी करदाता इकाई और कार्पोरेट घराने शामिल हैं, इस क्षेत्र का करीब 20 प्रतिशत अप्रत्यक्ष कर (सेवा और उत्पाद शुल्क) और करीब 14 प्रतिशत आय कर क संग्रह करती है।

GST के नए नियम से करदाता आशंकित, कारोबार सुगम बनाने के लिए की मांग

बेंगलुरु.देश की पहली बड़े करदाताओं की इकाई (एलटीयू) से जुड़ी बड़ी कारोबारी इकाइयां अगले साल लागू होने वाले प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के नियमों के प्रति आशंकित हैं और उन्होंने सरकार से भारत में कारोबार सुगम बनाने के लिए और सुविधाओं की मांग की है।

एलटीयू की स्थापना सबसे पहले कर्नाटक की राजधानी में हुई और यह उन पांच इकाइयों में शामिल है जिनकी स्थापना केंद्र सरकार ने उन सभी बड़ी इकाइयों की सुविधा के लिए एकल खिड़की के तौर पर की है जो उत्पाद शुल्क, कार्पोरेट-आय कर और सेवा कर जैसे विभिन्न करों का भुगतान करते हैं।
केंद्रीकृत इकाई जिसमें कर्नाटक और गोवा की 58 बड़ी करदाता इकाई और कार्पोरेट घराने शामिल हैं, इस क्षेत्र का करीब 20 प्रतिशत अप्रत्यक्ष कर (सेवा और उत्पाद शुल्क) और करीब 14 प्रतिशत आय कर क संग्रह करती है। इसके तहत करदाताओं की संख्या काफी कम होने के बावजूद एलटीयू की इस क्षेत्र के कुल राजस्व संग्रह में काफी बड़ी हिस्सेदारी है।
बॉश लिमिटेड के उपाध्यक्ष (अप्रत्यक्ष कर) जी एलांगो ने कहा लेकिन जब हम जीएसटी को अगले साल से लागू करने की बात कर रहे हैं तो हमारे दिमाग में कुछ अनुत्तरित प्रश्न हैं क्योंकि तब हमारे पास कारोबार की ऐसी ही सुगमता उपलब्ध होगा या हमें विभिन्न राज्यों के लिए अलग-अलग पंजीकरण कराना होगा। फिलहाल चीजें साफ नहीं है।
एलटीयू के आंकड़े के मुताबिक बॉश लिमिटेड ने फरवरी 2015 तक चालू वित्त वर्ष में विभिन्न करों के तहत कुल 741 करोड़ रुपए का भुगतान किया है। इसी तरह का आंकड़ा एबीबी इंडिया लिमटेड का भी है।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, क्या है पूरी खबर-
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-
Next Story
Share it
Top