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''इस्लाम में झींगा खाना हराम''- फतवे पर छिड़ा विवाद

झींगा खाने को लेकर जामिया निजामिया के मुफ्ती मोहम्मद अजीमुद्दीन का फतवा विवादों में घिर गया है। फतवे के खिलाफ कई मुफ्ती खुलकर सामने आ गए हैं।

झींगा खाने को लेकर जामिया निजामिया के मुफ्ती मोहम्मद अजीमुद्दीन का फतवा विवादों में घिर गया है। फतवे के खिलाफ कई मुफ्ती खुलकर सामने आ गए हैं। जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के मुफ्ती मोहम्मद अबरार ने झींगे को हराम बताने वाले फतवे का कड़ा विरोध किया है।

मुफ्ती मोहम्मद अबरार ने कहा, 'झींगे के अंदर खून नहीं होता। यह मछली प्रजाति की तरह है और इसे खाने में कोई हर्ज नहीं है। ' उलेमा-ए-देवबंद भी झींगा खाने को हराम नहीं मानता।

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जामिया निजामिया के प्रमुख मुफ्ती मोहम्मद अजीमुद्दीन के फतवे के मुताबिक झींगा मछली नहीं है, इसलिए वो मकरुह तहरीम है। मकरुह तहरीम का मतलब ऐसी चीज जिसे किसी भी हाल में खाया नहीं जाना चाहिए।

छात्रों का भी विरोध

झींगा खाने के खिलाफ दिए गए फतवे का मुस्लिम छात्रों ने भी विरोध किया है। हैदराबाद में मौजूद एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले मोहम्मद आमिर का कहना है, 'खाने पीने पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए और इस तरह का फतवा स्वीकार नहीं किया जा सकता।'

पूरी दुनिया में बढ़ रही खपत

भारत ही नहीं पूरी दुनिया में झींगा की खपत तेजी से बढ़ी है। देश में 30 हजार करोड़ का सलाना झींगा उत्पादन होता है और इसमें से ज्यादातर निर्यात हो जाता है। देश में खपत की बात करें तो बिना पैकेटबंद ताजा झींगा का बाजार तकरीबन 7,700 करोड़ रुपये का है। झींगा खाने वालों में हिंदू और मुसलमान दोनों हैं।

ये कहा गया फतवे में

जामिया निजामिया के प्रमुख मुफ्ती मोहम्मद अजीमुद्दीन फतवे पर कायम है। उन्होंने फतवा दिया है कि मुसलमानों के लिए झींगा घृणित है और इस्लाम उसे खाने की इजाजत नहीं देता। जामिया निजामिया 142 साल पुराना दक्षिण भारत का एक अहम मदरसा है।

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