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नोटबंदी से किसानों को बुवाई करने में उठानी पड़ रही है परेशानियां

छोटे किसान अपनी पहली फसल को तैयार करने के बाद अगली फसल की तैयारियां करने लगते हैं।

नोटबंदी से किसानों को बुवाई करने में उठानी पड़ रही है परेशानियां
नई दिल्ली. सरकार के 500 व 1000 के नोटबंदी के फैसले के बाद सभी सेक्टर के साथ कृषि क्षेत्र पर भी बहुत बुरा असर पड़ा है। इस फैसले के बाद किसान हलकान हैं। धान की फसल के बाद अब गेहूं की फसल की बुवाई का सीजन शुरू हो गया है, लेकिन नकदी न होने के कारण किसानों को खाद-बीज के लिए आसमान को ताकना पड़ रहा है।

हिसार के हांसी गांव के रहने वाले किसान प्रेम धान की ठूंठ जलाने के बाद अपना आधा खेत तैयार कर चुके हैं। उनके भाई गांव से हिसार चलकर कॉर्पोरेशन बैंक की लाइन में खड़े हैं। उनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि वे गेंहूं की बुवाई के लिए खाद-बीज की व्यवस्था कर सकें।

इकनॉमिक टाइम्स ने NH9 से नई दिल्ली से सिरसा तक का सफर किया और किसानों के मुश्किल हालात की जानकारी ली। सिरसा धान और कपास की खेती के मामले में हरियाणा का सबसे समृद्ध बेल्ट माना जाता है। छोटे किसान अपनी पहली फसल को तैयार करने के बाद अगली फसल की तैयारियां करने लगते हैं।

वे नकदी और अन्य जरूरतों के लिए मुख्यत: फसल पर ही निर्भर रहते हैं। वे अपनी फसल को बाजार में बेचकर अगले सीजन के लिए खाद-बीज की व्यवस्था करते हैं। इस समय रबी का सीजन चल रहा है जिसमें किसान गेहूं के अलावा आलू, मटर, सरसों जैसी फसलों की बुवाई करते हैं, लेकिन नकदी की समस्या होने के कारण किसानों की फसल पिछड़ रही है।

एनबीटी की खबर के अनुसार, अधिकतर किसानों ने हाल ही में अपना धान बेचा है, लेकिन बैंकों में बहुत भीड़ होने के कारण उन्हें अपना पैसा निकालने में खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। सिरसा में बड़ी जोत के किसान भूपेश मेहता ने कहा, 'सरकार के नोटबंदी के फैसले से किसान फंस गए हैं। किसानों के लिए यह सबसे ज्यादा व्यस्ततम समय होता है। उनकी पिछली फसल का पैसा फंसा हुआ है, और अगली फसल की बुवाई नहीं हो पा रही है। इस समय उन्हें खेत में होना चाहिए तो वे बैंक की लाइन में लगे हैं।'

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