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छत्तीसगढ़, एमपी में किसानों की कर्जमाफी, राजस्थान में जल्द आदेश

छत्तीसगढ़ सहित देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्र की सत्ताधारी भाजपा ने हिंदुत्व व राम मंदिर निर्माण जैसे मुद्दों को हवा देकर चुनावी लाभ लेने का प्रयास किया, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने तीन प्रमुख हिंदी भाषी राज्यों छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश व राजस्थान में किसानों की कर्जमाफी का जो दांव चला, वह उसके लिए सत्ता में वापसी का ब्रम्हास्त्र साबित हुआ।

छत्तीसगढ़, एमपी में किसानों की कर्जमाफी, राजस्थान में जल्द आदेश

छत्तीसगढ़ सहित देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्र की सत्ताधारी भाजपा ने हिंदुत्व व राम मंदिर निर्माण जैसे मुद्दों को हवा देकर चुनावी लाभ लेने का प्रयास किया, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने तीन प्रमुख हिंदी भाषी राज्यों छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश व राजस्थान में किसानों की कर्जमाफी का जो दांव चला, वह उसके लिए सत्ता में वापसी का ब्रम्हास्त्र साबित हुआ।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दरअसल जब भाजपा का फोकस धर्म पर था, उसी समय कांग्रेस ने किसानों की नब्ज पकड़ी। कर्जमाफी का दांव चलने से तीनों राज्यों में कांग्रेसी की वापसी हो सकी। यही जीत कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हो रही है। इससे पहले कांग्रेस ने पंजाब व कनार्टक में भी किसानों की कर्जमाफी का दांव खेला था, जो पूरी तरह सफल रहा।
कुल मिलाकर यह भी कहा जा सकता है कि एक तरफ भाजपा जहां हिंदुत्व और राम मंदिर की सियासत में जुटी है, वहीं कांग्रेस ने किसानों की नब्ज पकड़कर कर्जमाफी और समर्थन मूल्य जैसे वादों के सहारे 2019 की चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश की है। छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब और कर्नाटक जैसे राज्यों में कांग्रेस को इसमें सफलता मिलती भी नजर आती है। खासताैर पर छत्तीसगढ़ में जहां किसानाें की नब्ज थामी, कांग्रेस की झोली वोटों और सीटों से भर गई।

कर्जमाफी और समर्थन मूल्य का गणित

छत्तीसगढ़
किसानों की संख्या- 16 लाख 65 हजार.
कर्जमाफी और समर्थन मूल्य पर हाेने वाला खर्च- 6100 करोड़
मध्यप्रदेश
लाभान्वित किसानों की संख्या- 33 लाख
कर्जमाफी पर होने वाला खर्च- 20 हजार करोड़
राजस्थान- जल्द फैसले की तैयारी
ये कहना है कि खेती-किसानी से जुड़े नेताओं का
छत्तीसगढ़ के संदर्भ में यहां के प्रगतिशील किसान संगठन के अध्यक्ष हितेश वरू का कहना है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार बनने के कुछ ही घंटों के भीतर कर्जमाफी के वादों ने जहां कांग्रेस के प्रति किसानों का भरोसा एक बार फिर बढ़ाया है, किसानों को बड़े पैमाने पर इसका लाभ मिलेगा। अगर सहकारी बैंकों के साथ नेशनलाइज बैंकों में भी किसानों का कर्जा माफ कर दिया जाए, तो और भी अधिक किसानो को लाभ होगा।
कर्जामाफी से जहां किसानों को राहत मिलेगी, वहीं समर्थन मूल्य बढ़ाने से किसानों के जीवनस्तर में भी वृद्धि होगी। वहीं कांग्रेस के किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष चंद्रशेखर शुक्ला का कहना है कि समर्थन मूल्य में वृद्धि से किसानों को बड़ा लाभ मिला है। कांग्रेस ने जो वादा किया था, वह शपथ लेने के कुछ घंटों के भीतर ही पूरा कर दिखाया है, इससे कांग्रेस के पक्ष में किसानों का विश्वास बढ़ा है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को निश्चित रूप से इसका लाभ मिलेगा।
दूसरी ओर इस मामले में भाजपा का बयान कुछ अलग ही है। पार्टी का दावा है कि किसान अभी भी भाजपा के पक्ष में हैं। भाजपा के प्रवक्ता एवं प्रदेश उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने का कहना है कि ब्याज मुक्त ऋण से लेकर बोनस तक भाजपा ने हर तरह से किसानाें की मदद की है। कांग्रेस ने लोकलुभावन वादे किए, इसीलिए इस बार परिणाम उसके पक्ष में रहा, लेकिन किसान अब भी भाजपा के साथ हैं।
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