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जासूसी कांडः समाजवादी पार्टी के नेता का पीए गिरफ्तार

फहात समाजवादी पार्टी के नेता मुनव्वर चौधरी का पीए है

जासूसी कांडः समाजवादी पार्टी के नेता का पीए गिरफ्तार
नई दिल्ली. जासूसी रैकेट में क्राइम ब्रांच ने एक और शख्स को गिरफ्तार किया है। इस शख्स का नाम फहात बताया जा रहा है। जानकारी मिली कि वह यूपी का रहने वाला है। फहात समाजवादी पार्टी के नेता मुनव्वर चौधरी का पीए है।
गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गुरुवार को एक जासूसी रैकेट का पर्दाफाश किया था। पुलिस ने करीब 12 घंटे का ऑपरेशन चलाकर इस जासूसी कांड का पर्दाफाश किया था। पुलिस इस रैकेट के पीछे पिछले 6 महीनों से लगी हुई थी। उस गिरोह पर बॉर्डर पर तैनात भारतीय सुरक्षा बल से जुड़ी सीक्रेट जानकारी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ (ISI) तक पहुंचाने का आरोप है।
इस गिरोह में पुलिस ने कुल चार लोगों को पूछताछ के लिए पकड़ा था। पुलिस ने महमूद अख्तर, रमजान खान और सुभाष जांगीर को पकड़ा था। इन तीनों को दिल्ली के चिड़िया घर के पास से पकड़ा गया था। महमूद अख्‍तर पाकिस्तान उच्‍चायोग के वीजा विभाग में काम करता था।
ज्‍वाइंट पुलिस कमिश्‍नर, क्राइम ब्रांच आरएस यादव ने अख्‍तर के बारे में कई खुलासे किए हैं। उन्‍होंने बताया कि अख्‍तर ने खुद के चांदनी चौक का निवासी होने का दावा किया, मगर सख्‍ती से पूछताछ के बाद उसने कबूल लिया कि उसका नाम महमूद अख्‍तर है। अख्‍तर ने खुद को भारतीय दिखाने के लिए आधार कार्ड तक बनवा रखा था।
पुलिस ने बताया था कि खान और जांगीर अख्तर द्वारा दिए गए निर्देषों को फॉलो करते थे। पुलिस ने यह भी बताया था कि दोनों लोग लगभग दो साल पहले अख्तर से मिले थे। दोनों को राजस्थान में रहने वाले शोएब नाम के प्राइवेट वीजा एजेंट ने अख्तर से मिलवाया था। उसने कहा था कि अख्तर काम के बदले उनको अच्छा पैसा देगा। पुलिस ने गुरुवार रात को ही शोएब को भी पकड़ लिया था।
पूछताछ में अख्‍तर ने बताया कि वह जनवरी 2013 से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ के लिए प्रतिनियुक्ति पर है और पाकिस्तानी सेना की 40वीं बलूच रेजीमेंट का हवलदार है तथा रावलपिंडी के काहुटा गांव का रहने वाला है। पुलिस के एक वरिष्‍ठ अधिकारी के मुताबिक, ”चूंकि अख्तर वीजा विभाग में काम कर रहा था, इससे उसे ऐसे लोगों की पहचान करने में मदद मिल गई कि कौन लोग उसके लिए काम कर सकते हैं। जिन लोगों की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, उन्हें बड़ी राशि देने का प्रलोभन दिया जाता था।’’
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