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शर्मनाक! यहां नर्क से भी बदतर है वेश्याओं की जिंदगी, डिलीवरी के आधे घंटे बाद लौटना पड़ा धंधे पर

वेश्याएं गरीबी के चलते अपनी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए काम करती हैं। इनमें से एक तो इसलिए धंधे पर निकली क्योंकि उसे अपनी खराब वॉशिंग मशीन सही करानी थी।

शर्मनाक! यहां नर्क से भी बदतर है वेश्याओं की जिंदगी, डिलीवरी के आधे घंटे बाद लौटना पड़ा धंधे पर

भारत में सरकारी नियमों के अनुसार बच्चा पैदा होने पर महिलाओं को 6 महीने की मैटरनिटी लीव मिलती है। लेकिन ये सुविधा हर महिला को नसीब नहीं होती। कुछ महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें काम पर वापस लौटना पड़ता है, जिसके पीछे की वजह है उनकी गरीबी।

इग्लैंड में एक ऐसी ही खबर सामने आई है। यहां के न्यूज पेपर ‘हल डेली मेल’ में छपी एक खबर के मुताबिक, यहां एक वेश्या को अपनी डिलीवरी के आधे घंटे बाद ग्राहक लेने लौटना पड़ा।

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इग्लैंड में रेड लाइट एरिया में वेश्याओं के हक में काम करने वाली संस्था जैकी फेयरबैंक्स ने Hull Daily Mail से बात करते हुए इंग्लैंड की वेश्याओं के नरकीय जीवन के बारे में बताया है।

लड़कियां बॉयफेंड या दलाल के झांसे का हुई शिकार

यहां रेड लाइट एरिया में काम करने वाली कई महिलाओं के साथ बचपन में मानसिक और शारीरिक शोषण हुआ है। साथ ही इनमें से कई हिंसा का भी शिकार हुई हैं। इस धंधे में आई कई लड़कियां और महिलाएं ऐसी हैं, जो बेघर हैं या उनके बॉयफ्रेंड या दलाल ने उन्हें झांसा देकर यहां बेच दिया है।

गरीबी के चलते धंधा करने पर मजबूर

फेयरबैंक्स के अनुसार, यहां वेश्याएं गरीबी के चलते अपनी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए काम करती हैं। इनमें से एक तो इसलिए धंधे पर निकली क्योंकि उसे अपनी खराब वॉशिंग मशीन सही करानी थी।

पुलिस पर नहीं है भरोसा

फेयरबैंक्स के अनुसार, ये वेश्याएं चाहे कितने भी बुरे हालात को क्यूं न झेले लेकिन वो कभी पुलिस के पास मदद के लिए नहीं जातीं। क्योंकि इनका कहना है कि पुलिस द्वारा उन्हें न ही सम्मान और न ही किसी मदद की उम्मीद है।

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वेश्याओं के हालात पहले से बेहतर- फेयरबैंक्स

वेश्याओं के लिए काम करने वाली संस्था इस बात से खुश हैं कि कम से कम अब वेश्याओं के साथ रेप और हत्या के मामले तो कम हो गए हैं। वरना पहले तो उनके बहुत बुरे हालात थे और उन्हें जीवित रहने का अधिकार ही नहीं था।

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