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चुनावी बॉन्ड काले धन को सफेद करने का माध्यम बनेगा: येचुरी

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने शनिवार को कहा है कि राजनीतिक दलों के चंदे को पारदर्शी बनाने के नाम पर चुनावी बॉड जारी करने की सरकार की पहल राजनीतिक भ्रष्टाचार को वैध बनाने का तरीका साबित होगी।

चुनावी बॉन्ड काले धन को सफेद करने का माध्यम बनेगा: येचुरी

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने शनिवार को कहा है कि राजनीतिक दलों के चंदे को पारदर्शी बनाने के नाम पर चुनावी बॉड जारी करने की सरकार की पहल राजनीतिक भ्रष्टाचार को वैध बनाने का तरीका साबित होगी। येचुरी ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चुनावी बॉंड राजनीतिक चंदे के नाम पर काले धन को सफेद धन में तब्दील करने का माध्यम बनेगा।

यह अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र, दोनों के लिये सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि इसके राजनीतिक, कानूनी और आर्थिक खतरों के मद्देनजर माकपा ने चुनावी बॉंड को जारी करने के लिये वित्त अधिनियम 2017 के माध्यम से जनप्रतिनिधित्व कानून, आरबीआई अधिनियम, आयकर अधिनियम और कंपनी कानून में किये गये संशोधनों की संवैधानिकता को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है।

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सर्वोच्च अदालत ने याचिका में चुनावी बॉंड के नकारात्मक पहलुओं पर संज्ञान लेते हुये केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है। येचुरी ने कहा कि चुनावी बॉंड के जरिये विदेशों से मिलने वाले चंदे को वैध बनाने के लिये सरकार ने विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (एफसीआरए) में भूतलक्षी प्रभाव से लागू करने के लिए संशोधन किया है। इससे कोई भी विदेशी नागरिक, कंपनी या निकाय किसी भी भारतीय राजनीतिक दल को असीमित चंदा दे सकेगा।

इसमें चंदा देने वाले और लेने वाले, किसी भी व्यक्ति अथवा संस्था की पहचान को सार्वजनिक करना अनिवार्य नहीं होगा। माकपा नेता ने चुनावी बॉंड की पहल को काले धन से राजनीतिक भ्रष्टाचार को सींचने वाली व्यवस्था बताते हुये कहा कि यह ‘सूचना के अधिकार' पर भी कुठाराघात करेगा। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 19 और 14 का उल्लंघन बताते हुये भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिये खतरा बताया।

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येचुरी ने चुनावी बॉंड को छोटे राजनीतिक दलों के वजूद को खतरा बताते हुये कहा ‘‘छोटी पार्टियों को अगर जिंदा रखना है तो चुनावी बॉंड के प्रावधानों को हटाना होगा वरना छोटे दल चुनाव भी नहीं लड़ पायेंगे।

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