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Delhi Election 2020 : वोटर्स की उंगली पर लगाई जाने वाली स्याही आती कहां से है, यहां जानिए खास बातें

Delhi Election 2020 : चुनाव के दौरान फर्जी वोटिंग भी की जाती है, इसलिए व्यक्ति को दोबारा वोटिंग से रोकने के लिए मतदाता की उंगली पर स्याही लगाई जाती है। ताकि वह फर्टी वोटिंग नहीं करने जा पाये। यह स्याही इतनी पक्की होती है कि इसे आसानी से छुटाया नहीं जा सकता है।

Delhi Election 2020 : वोटर्स की उंगली पर लगाई जाने वाली स्याही आती कहां से है, यहां जानिए खास बातेंदिल्ली विधानसभा चुनाव 2020

Delhi Election 2020 : दिल्ली में शनिवार को विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। 8 फरवरी को सुबह आठ बजे से दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर मतदान शुरू होकर शाम छह बजे तक जारी रहेगा। चुनाव के दौरान फर्जी वोटिंग भी की जाती है, इसलिए व्यक्ति को दोबारा वोटिंग से रोकने के लिए मतदाता की उंगली पर स्याही लगाई जाती है। ताकि वह फर्टी वोटिंग नहीं करने जा पाये। यह स्याही इतनी पक्की होती है कि इसे आसानी से छुटाया नहीं जा सकता है। लेकिन क्या आपको मालूम है कि ये स्याही कहां और कैसे बनती है। इस स्याही की ऐसी क्या विशेषता होती है कि मतदान के दौरान सिर्फ इसी स्याही का इस्तेमाल किया जाता है? तो चलिए आपको बताते हैं..

इसी स्याही के बारे में एक दिलचस्प बात यह भी है कि भारत में सिर्फ दो कंपनियां हैं जो वोटर इंक बनाती हैं- हैदराबाद के रायडू लैब्स और मैसूर के मैसूर पेंट्स ऐंड वॉर्निश लिमिटेड। यही दोनों कंपनियां पूरे देश को वोटिंग के लिए इंक सप्लाइ करती हैं। यहां तक कि इनकी इंक विदेशों में भी जाती है।

कहां बनती है ये स्याही?

* वोटिंग के दौरान इस्तेमाल होने वाली स्याही (इंक) का निर्माण हैदराबाद के रायडू लैब्स और मैसूर के मैसूर पेंट्स ऐंड वॉर्निश लिमिटेड करती है।

* मैसूर पेंट्स ऐंड वॉर्निश लिमिटेड कंपनी कर्नाटक सरकार की है। देश में होने वाले हर चुनाव में यहां से ही स्याही सप्लाई की जाती है।

* उंगली पर इस स्याही का निशान तकरीबन एक महीने तक महीने तक रहता है।

* मतदान में पहली बार इस स्याही का इस्तेमाल आज 1962 के आम चुनाव में हुआ था।

क्या है स्याही की विशेषता?

* जब यह स्यही सूरज की रौशनी में आते है तो स्याही का केमिकल रंग बदलता है।

* नेशनल फिजिकल लैबोरेटरी ऑफ इंडिया के केमिकल फोर्मुले के द्वारा स्याही तैयार की जाती है।

* सिल्वर नाइट्रेट का स्याही में मुख्य रूप से उपयोग किया जाता है। इसलिए स्याही उंगली पर से आसानी से नहीं छुटती है।

* इस स्याही का निर्यात मलेशिया, मालदीव, कंबोडिया, अफगानिस्तान, मिस्र और दक्षिण अफ्रीका में किया जाता है।

* स्याही को मतदाता के दौरान बाएं हाथ के अंगूठे के बाजू वाली उंगली के नाखून और चमड़ी पर लगाया जाता है।

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