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इकनॉमिक सर्वे में बड़ा खुलासा, लड़के की चाह में इतनी करोड़ लड़कियां हुई पैदा, इतनी की हुई हत्याएं

इकनॉमिक सर्वे 2017-18 की रिपोर्ट के मुताबिक, लड़के की चाह में 2.1 करोड़ लड़कियां पैदा हुई। वहीं गर्भ में बेटी होने के कारण 6.3 करोड़ भ्रूणों की हत्या भी की गई।

इकनॉमिक सर्वे में बड़ा खुलासा, लड़के की चाह में इतनी करोड़ लड़कियां हुई पैदा, इतनी की हुई हत्याएं

हर साल बजट सत्र की शुरूआत के साथ ही देश का इकनॉमिक सर्वे संसद में पेश किया जाता है। इस बार इकनॉमिक सर्वे में लिंग रेश्यू को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

इकनॉमिक सर्वे 2018-19 की रिपोर्ट के मुताबिक, अब भी भारत में बेटी की चाह में करोड़ों बेटियां पैदा हो रही है। जिन्हें समाज के लोग पैदा नहीं करना चाहते हैं। सर्वे में जिन राज्यों का जिक्र किया गया है, उनमें कोई राज्य पिछड़ा नहीं हैं बल्कि 'पर कैपिटा इनकम' के मामले में काफी आगे हैं।

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सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में करीब 2.1 करोड़ अनचाही लड़कियां हैं, यानी कि बेटे की चाह में ये लड़कियां पैदा हुईं हैं। सर्वेक्षण में लैंगिक असमानता को खत्म करने और महिलाओं के विकास की बात कही गई।

इकोनॉमि‍क सर्वे के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा में लिंग अनुपात के मामले में सबसे ज्यादा नीचे है। सर्वे के मुताबिक, लड़के पैदा करने के लिए भारतीय अंतिम समय तक ट्राई करते रहते हैं।

बता दें कि यहां लिंग अनुपात 1000 लड़कि‍यों पर 1200 लड़के के आसपास है। गर्भपात और लड़का होने पर संतान बंद कर देने की वजह इन राज्यों में लिंग अनुपात में इतना बड़ा फर्क है।

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वहीं दूसरी तरफ अगर इन दो के अलावा अन्य राज्यों की बात करें तो मेघालय राज्य की स्थिति सबसे अच्छी है। जहां जन्म के समय लिंग अनुपात और आखिरी संतान के वक्त लिंग अनुपात दोनों बिल्कुल एक समान स्थिति में हैं। इसके अलावा असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में भी स्थिति ठीक है।

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