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सीरिया: हमलों से डरे-सहमे बच्चे भूल गए हैं रोना भी

बच्चों ने खून-खराबा, संघर्ष और तबाही देखी है।

सीरिया: हमलों से डरे-सहमे बच्चे भूल गए हैं रोना भी
अलेप्पो. सीरिया के अलेप्पो में सीरियाई सेना की कार्रवाई और इसके बाद हुई तबाही से बचकर भागे लोगों में हजारों बच्चें गहरे सदमे में हैं। ये बच्चे इतने सदमे में हैं कि उन्होंने रोना तक छोड़ दिया है। बच्चों ने इतना खून-खराबा, संघर्ष और तबाही देखी है कि शायद अब वे रोना भूल गए हैं।
संयुक्त राष्ट्र (UN) के मुताबिक, हाल के दिनों में तुर्की और रूस के बीच हुए समझौते के बाद जिन 8,000 लोगों को पूर्वी अलेप्पो छोड़कर जाने की इजाजत दी गई है, उनमें 2,700 बच्चे हैं। माना जा रहा है कि शहर में अब भी 40,000 से ज्यादा असैन्य लोग फंसे हुए हैं।
चैनल 4 न्यूज द्वारा दिखाए गए एक विडियो में एक छोटी बच्ची दिखाई दे रही है। इस बच्ची का नाम अया है और वह अलेप्पो में आखिरी सलामत बचे अस्पताल के एक स्ट्रेचर पर बैठी हुई है। उसका चेहरा धूल और खून से ढका हुआ है। वह जिस कमरे में है, वहां और भी कई परेशान जख्मी लोग हैं। पूरे कमरे में अफरा-तफरी का माहौल है, लेकिन इन सबसे डरकर अया बिल्कुल नहीं रो रही है। अया की मां का नाम उम फातिमा है। वह जिस एक इमारत में रहती थीं, वहां उनके परिवार के अलावा 2 और परिवार भी रहते थे। रूस और राष्ट्रपति बशर अल-असद की गठबंधन सेना द्वारा की जा रही हवाई बमबारी के दौरान उनकी इमारत पर भी एक बम गिरा। जिस समय यह बम गिरा, उस समय सभी लोग अपने घरों में सो रहे थे। फातिमा इन तीनों परिवारों में जिंदा बची अकेली वयस्क हैं।

हवाई बमबारी और धमाकों से यहां के बच्चे सहम गए हैं। इन बच्चों ने रोना भी छोड़ दिया है।
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