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1 फरवरी से लागू हो जाएगा ई-वे बिल, जानें इससे जुड़ी सारी जानकारी!

इंटर स्टेट ई-वे बिल के लिए काउंसिल ने 1 फरवरी 2018 की डेडलाइन तय की है जबकि इंट्रा स्टेट ई-वे बिल के लिए 1 जून 2018 की तारीख तय की गई।

1 फरवरी से लागू हो जाएगा ई-वे बिल, जानें इससे जुड़ी सारी जानकारी!

वस्तु एवं सेवा कर के तहत ई-वे लागू होने जा रहा है। ई-वे बिल का फैसला जीएसटी काउंसिल की बैठक में किया गया था। 15 जनवरी को ई-वे बिल सिस्टम का ट्रायल रन शुरू होगा। ई-वे बिल ट्रांसपोर्टेशन के आधार पर दो तरह से लागू होगा। इंटर स्टेट ई-वे बिल के लिए काउंसिल ने 1 फरवरी 2018 की डेडलाइन तय की है जबकि इंट्रा स्टेट ई-वे बिल के लिए 1 जून 2018 की तारीख तय की गई।

इस बिल के लागू होने से बड़ा फायदा ये होगा कि सरकार टाक्स चोरी पर लगाम लगा सकेगी। आइए जानते हैं ई-वे बिल के बारे में कि आखिर ये किस बारे में है।
क्या है ई-वे बिल
इस बिल के तहत 50,000 रुपए या उससे अधिक अमाउंट के प्रोडक्ट की राज्य या राज्य से बाहर ट्रांसपोर्टेशन या डिलिवरी करने के लिए सराकर को इसके बारे में ऑनलाइन रेजिस्ट्रेशन के जरिए बताना होगा। इसके तहत सबसे पहले ई-वे बिल जेनरेट करना होगा जो 1 से 15 दिन तक मान्य होगा। यह मान्यता प्रोडक्ट ले जाने की दूरी के आधार पर तय होगा। बता दें कि 100 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 1 दिन का ई-बिल बनेगा और 1000 किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए 15 दिनों का ई-बिल बनेगा।
ई-वे बिल से कॉन्ट्रासेप्टिव, ज्युडिशियल और नॉन ज्युडिशियल स्टैंप पेपर, न्यूजपेपर, ज्वैलरी, खादी, रॉ सिल्क, इंडियन फ्लैग, ह्युमन हेयर, काजल, दिये, चेक, म्युनसिपल वेस्ट, पूजा सामग्री, एलपीजी, किरोसिन, हीटिंग एड्स और करेंसी को ई-वे बिल से बाहर रखा गया है।
इंट्रा और इंटर स्टेट में क्या अंतर है
राज्य के अंदर ही स्टॉक के ट्रांसपोर्टेशन को इंट्रा स्टेट इ-वे बिल के तहत रखा जाएगा। वहीं राज्य के बाहर यानी अन्य राज्य में स्टॉक भेजने या मांगने के लिए इंटर स्टेट ई-वे बिल बनवाया जाएगा।जिस तारीख से ई-वे बिल लागू होगा उसे अलग से नोटिफाई किया जाएगा।
मल्टिपल कन्साइनमेंट के लिए ट्रांसपोटर्स को कंसॉलिडेट ई-वे बिल बनवाना होगा। अगर गुड्स को एक व्हीकल से दूसरे में ट्रांसफर करना है तो ई-वे बिल की जरूरत होगी। ई-वे बिल की जरूरत नॉन-मोटर कनवेंस, पोर्ट से ट्रांसपोर्ट होने वाले गुड्स, एयरपोर्ट, एयर कार्गो कॉम्पलेक्स और लैंड कस्टम स्टेशन के लिए जाने वाले और आने वाले गुड्स पर नहीं होगी।
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